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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 269, कुल 800 में से

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पृष्ठ 269

आयुर्दायाध्यायः २७१
लग्नाधीशश्चरे यस्य द्वन्द्भे रन्ध्रनायके।
तस्याल्पायुर्महाप्राज्ञ निर्विशङ्कं द्विजोत्तम॥२८॥
अथवा लग्नेश और अष्टमेश दोनों स्थिर राशि में ही हों तो भी अल्पायु
योग होता है॥२८॥
स्थिरे स्थिरे स्थितौ द्वौ चेल्लग्नरन्ध्राधिपौ द्विज।
अल्पायुस्तत्र विज्ञेयं सृष्टिकर्त्रा प्रणोदितम्॥२९॥
इसी प्रकार शनि-चन्द्रमा या लग्न-चन्द्रमा तथा होरालग्न और जन्मलग्न
से भी आयु लाना चाहिए॥२९॥
एकरूपत्वयोगौ द्वौ तृतीयो भिन्नरूपकः।
द्वयोर्योगेन सङ्ग्राह्यं न ग्राह्यं चैकरूपतः॥३०॥
यदि तीनों प्रकार में दो प्रकार से एक आयु और तीसरे से भिन्नायु आती
हो तो दो प्रकार से आई हुई आयु को ही लेना चाहिए॥३०॥
योगत्रयं त्रयं रूपं भिन्नं भिन्नं भवेद्द्विज।
होरालग्नविलग्नाभ्यां प्राप्तायुर्योगनिश्चितम्॥३१॥
यदि तीनों प्रकार से भिन्न-भिन्न आयु आती हो तो होरालग्न और लग्न
से जो आयु आती हो उसे ही लेना चाहिए।॥३१॥
अथाहं सम्प्रवक्ष्यामि आयुर्वर्षाणि भो द्विज।
यस्य ज्ञानं विना विद्वन् स्पष्टायुर्नोपलभ्यते॥३२॥
हे द्विज! अब मैं आयु के वर्गों को कह रहा हूँ, जिसके ज्ञान के
बिना आयु की स्पष्टता नहीं होती है॥३२॥
रसाङ्कैर्गजाभ्रेन्दुभिः शून्यमासैस्त्रिधा दीर्घमायुः कलौ सम्प्रदिष्टम्।
चतुःषष्टिबाह्वद्र्यशीति प्रमाणैर्मतं मध्यमायुर्नृणां वत्सरैः स्यात्॥
९०, १०८, १२० वर्ष ये तीन प्रकार की दीर्घायु कलियुग में होती है।
६४, ७२, ८० वर्ष की मध्यमायु होती है॥३३॥
तथा द्वित्रिषड्वह्निदेनशून्याब्धिवर्षै-
र्भवेदल्पमायुर्नराणां युगान्ते॥३४॥
३२, ३६, ३० वर्ष की अल्पायु का प्रमाण कहा है॥३४॥
योगत्रयेण दीर्घायुस्तदा ग्राह्यं खवेदकम्।
योगद्वयेन सम्प्राप्ते ग्राह्यं षट्त्रिंशताब्दकम्॥३५॥