बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
अग्निभूमिनभस्तोयवायवः क्रमतो द्विज।
भौमादीनां ग्रहाणां च तत्त्वाश्चामी प्रकीर्त्तिताः।।१९।।
भौमादि ग्रहों में क्रम से अग्नि, भूमि, आकाश, जल, वायु ये तत्त्व हैं ।।१९।।
गुरुशुक्रौ विप्रवर्णौ कुजार्कौ क्षत्रियौ द्विज।
शशिसौम्यौ वैश्यवर्णौ शनिः शूद्रो द्विजोत्तम ।।२०।।
गुरु-शुक्र का ब्राह्मण वर्ण, भौम-सूर्य का क्षत्रिय वर्ण, चन्द्रमा-बुध का
वैश्य वर्ण और शनि का शूद्र वर्ण है।।२०।।
चन्द्रसूर्यगुरुसौम्या भृग्वारशनयो द्विज!।
सत्त्वं रजस्तम इति स्वभावो ज्ञायते क्रमात् ।।२१।।
चन्द्र, सूर्य, गुरु इनका सतोगुणी स्वभाव, बुध-शुक्र का रजोगुणी स्वभाव
और भौम-शनि का तमोगुणी स्वभाव है।।२१।।
मधुपिङ्गलदृक्सूर्यश्चतुरस्रः शुचिर्द्विज।
पित्तप्रकृतिको श्रीमान्पुमानल्पकचो द्विज ।।२२।।
सूर्य- मधु के सदृश पीले नेत्रोंवाला, चौखूटी शरीर, स्वच्छ कान्ति
वाला, पित्त प्रकृति, दर्शनीय, पुरुषग्रह, थोड़े बालों से युक्त स्वरूपवाला
है।।१२।।
बहु वातकफः प्राज्ञश्चन्द्रो वृत्ततनुर्द्विज!।
शुभदृक् मधुवाक्यश्च चञ्चलो मदनातुरः ।।२३।।
चन्द्रमा- वायु और कफ से युक्त प्रकृति, बुद्धिमान्, गोल शरीर, सुन्दर
नेत्र, मीठे वचन बोलनेवाला, चंचल और कामी है।।२३।।
क्रूररक्तेक्षणो भौमश्चपलोदारमूर्त्तिकः।
पित्तप्रकृतिकः क्रोधी कृशमध्यतनुर्द्विज ।।२४।।
भौम- क्रूर स्वभाव, रक्तवर्ण की दृष्टि, चपल, उदार स्वभाव, पित्त
प्रकृति, क्रोधी, पतली मध्यम कद की शरीरवाला है।।२४।।
वपुः श्रेष्ठो श्लिष्टवाक्य ह्यतिहास्यरुचिर्बुधः।
पित्तवान्कफवान्विप्र मारुतप्रकृतिकस्तथा ।।२५।।
बुध- अच्छी शरीर, तोतली बोली वाला, अत्यंत हँसी करनेवाला, पित्त-
कफ-वायु से युक्त प्रकृतिवाला है।।२५।।