बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रहस्वरूपाध्यायः २७
पराशरजी बोले- हे विप्र ! सूर्य कालपुरुष (उत्पन्न पुरुष) की आत्मा,
चन्द्रमा मन, मंगल सत्त्व, बुध वाणी है ।।१।।
देवेज्यो ज्ञानसुखदो भृगुवीर्यप्रदायकः।
विचार्यतामिदं सर्वं छायासूनुश्च दुःखदः ।।२।।
गुरु ज्ञान और सुख और शुक्र बल के तथा शनि दुःख के स्वामी हैं ।।२।।
राजानौ भानुहिमगू नेता ज्ञेयो धरात्मजः।
बुधो राजकुमारश्च सचिवौ गुरुभार्गवौ ।।३।।
ग्रहों में सूर्य और चन्द्रमा राजा, मंगल नेता, बुध राजकुमार, गुरु और
शुक्र मन्त्री हैं ।।३।।
प्रेष्यको रविपुत्रश्च सेना स्वर्भानुपुच्छकौ।
एवं क्रमेण वै विप्र ! सूर्यादीनां विचिन्तयेत् ।।४।।
शनि दास और सेना राहु तथा केतु हैं। इस प्रकार सूर्यादि ग्रहों से विचार
करना चाहिए ।।४।।
रक्तश्यामो दिवाधीशो गौरगात्रो निशाकरः।
अत्युच्चाङ्गो रक्तभौमो दुर्वाश्यामो बुधस्तथा ।।५।।
हे द्विजश्रेष्ठ ! सूर्य का श्यामता लिये हुए रक्तवर्ण, चन्द्रमा का गौरवर्ण,
मंगल का ऊँचा शरीर रक्तवर्ण, बुध का दूर्वा के समान श्यामवर्ण है ।।५।।
गौरगात्रो गुरुर्ज्ञेयः शुक्रः श्यामस्तथैव च।
कृष्णदेहो रवेः पुत्रो ज्ञायते द्विजसत्तम ।।६।।
गुरु का गौरवर्ण, शुक्र का श्याम वर्ण और शनि का काला वर्ण है ।।६।।
वह्न्यम्बुशिखिजा विष्णुविडौजशचिका द्विज ।
सूर्यादीनां खगानाञ्च नाथाः ज्ञेयां क्रमेण च ।।७।।
सूर्य के अग्नि, चन्द्रमा के जल, भौम के स्वामि कार्त्तिक, बुध के विष्णु,
गुरु के इन्द्र, शुक्र के इन्द्राणी और शनि के ब्रह्मा स्वामी हैं ।।७।।
क्लीवौ द्वौ सौम्यसौरी च युवतीन्दुभृगुद्विज।
नरा शेषाश्च विज्ञेया भानुभौमौ गुरुस्तथा ।।८।।
बुध और शनि ये नपुंसक, चन्द्रमा और शुक्र स्त्रीग्रह और शेष सूर्य,
भौम और गुरु ये पुरुषग्रह हैं ।।८।।