बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंराशिप्रभेदाध्यायः २५
ससस्यदहना वैश्या चित्रवर्णा प्रभञ्जिनी।
कुमारी तमसायुक्ता बालभावा बुधाधिपः॥१४॥
धान को भूजती हुई, चित्र वर्ण (छींट) के वस्त्र को पहने हुई कन्या
तमोगुण से युक्त बालभाव वाली है और बुध इसके स्वामी हैं॥१४॥
अथ तुलाराशिस्वरूपम्-
शीर्षोदयी द्युवीर्याढ्यस्तथा शूद्रो रजोगुणी ।
शुक्रोऽधिपो पश्चिमेशो तुलो मध्यतनुर्द्विपात्॥१५॥
तुलाराशि शीर्षोदयी, दिवाबली, शूद्रवर्ण, रजोगुणी, पश्चिम दिशा
की स्वामी, मध्यम शरीरवाली है और शुक्र स्वामी हैं॥१५॥
अथ वृश्चिकराशिस्वरूपम्-
शीर्षोदयोऽथ स्वल्पाङ्गो बहुपाद्ब्राह्मणो बली।
सौम्यस्थो दिनवीर्याढ्यः पिशङ्गो जलभूचरः।
रोमस्वाढ्योऽतितीक्ष्णाङ्गो वृश्चिकश्च कुजाधिपः॥१६॥
वृश्चिक राशि- शीर्षोदय राशि, छोटा शरीर, अनेक चरण, ब्राह्मण
वर्ण, उत्तर दिशा में बली, दिवाबली, धुम्रवर्ण जलीय भूमि पर चलने वाली
है॥१६॥
रोम से युक्त शरीर, अत्यन्त तीखे अंगोवाली है और भौम स्वामी हैं।
अथ धनुराशिस्वरूपम्-
अश्वजङ्घो त्वथ धनुर्गुरू स्वामी च सात्त्विकः॥१७॥
पिङ्गलो निशि वीर्याढ्यः पावकः क्षत्रियो द्विपाद्।
आदावन्ते चतुष्पाद् समगात्रो धनुर्धरः॥१८॥
धन राशि को घोड़े का जंघा है, सात्त्विक राशि है॥१७॥
पिंगल वर्ण, रात्रिबली, अग्निराशि, क्षत्रिय वर्ण, पूर्वार्ध द्विपद और
उत्तरार्ध चतुष्पद, समान शरीर, धनुष को लिये हुए है॥१८॥
पूर्वस्थो वसुधाचारी तेजवान्पृष्ठतोद्गमी।
पूर्वदिशा का स्वामी, भूमि पर रहने वाली, तेजस्वी, पृष्ठोदयी है और
गुरु इसके स्वामी हैं।
अथ मकरराशिस्वरूपम्-
मन्दाधिपस्तमी भौमी याम्येऽट् च निशि वीर्यवान्॥१९॥
- पृष्ठोदयी बृहद्गात्रः मकरो जलभूचरः।