बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंराशिप्रभेदाध्यायः २३
पराशर उवाच-
अहोरात्र्याद्यन्तलोपाद्धोरेतिं प्रोच्यते बुधैः ।
तस्य हि ज्ञानमात्रेण जातकर्म फलं वदेत् ॥१२॥
पराशर जी बोले- अहोरात्र शब्द के आदिम वर्ण 'अ' और अन्तिम
वर्ण 'त्र' का लोप हो जाने से होरा शब्द होता है, जिसका ज्ञान होने से जातक
के शुभ-अशुभ फल का ज्ञान होता है॥१२॥
मेषो वृषश्च मिथुनः कर्कसिंहकुमारिकाः ।
तुलालिधनुषो नक्रकुम्भमीनास्ततः परम्॥३॥
मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धन, मकर, कुम्भ
और मीन ये बारह राशियाँ हैं॥३॥
शीर्षाननौ तथा बाहू हृत्क्रोडकटिवस्तयः।
गुह्योरुजानुयुग्मे वै युगले जङ्घके तथा॥४॥
जन्मलग्न से उक्त बारह राशियाँ क्रम से शिर, मुख, दोनों भुजायें,
हृदय, पेट, कटि, बस्ति (नाभिलिंग के मध्यभाग को बस्ति कहते हैं),
गुह्यस्थान (स्त्री-पुरुष के चिह्न), उरु, दोनों जानु, जंघे हैं॥४॥
चरणौ द्वौ तथा लग्नात् ज्ञेयाः शीर्षादयः क्रमात्।
चरस्थिरद्विस्वभावाः क्रूराक्रूरौ नरस्त्रियौ ॥५॥
दोनों चरण कालपुरुष के अंग में हैं। मेषादि राशियों की क्रम से चर,
स्थिर, द्विस्वभाव तथा क्रूर, शुभ और पुरुष स्त्री संज्ञायें हैं॥५॥
पित्तानिलस्त्रिधा त्वैक्यं श्लेष्मिकाश्च क्रियादयः।
रक्तवर्णो बृहद्गात्रश्चतुष्पाद्रात्रिविक्रमी ॥६॥
पित्त, वायु, पित्त वायु कफ तीनों मिले हुए, और कफ प्रकृति है मेष राशि
का लाल वर्ण, बड़ी शरीर, चार पैर, रात में बलवान् हैं॥६॥
अथ मेषराशिस্বরূপम्-
पूर्ववासी नृपज्ञातिः शैलचारी रजोगुणी ।
पृष्ठोदयी पावकी च मेषराशिः कुजाधिपः ॥७॥
पूर्व दिशा, क्षत्रिय वर्ण, पर्वतीय प्रदेश में घुमनेवाली, रजोगुणी, पृष्ठोदयी
अग्निराशि है और इसके स्वामी मंगल हैं॥७॥
अथ वृषराशिस্বরূপम्-
श्वेतः शुक्राधिपो दीर्घः चतुष्पाच्छर्वरी बली।
याम्येट् ग्राम्यो वणिग्भूमिः स्त्री पृष्ठोदयो वृषः॥८॥