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सर्वकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 122, कुल 800 में से

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पृष्ठ 122

१२४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्
रविणा संयुते केतौ कारकांशाद्व्ययस्थिते।
गौर्यां भक्तिर्भवेत्तस्य शाक्तिको जायते नरः।।७६।।
केवल बारहवें भाव में केतु हो और पापग्रह से युत-दृष्ट हो तो उसकी
मुक्ति नहीं होती है और मोक्ष भी नहीं होता है। कारकांश से बारहवें
भाव में केतु सूर्य से युत हो तो पार्वती की भक्ति करने वाला शाक्त होता
है।।७५-७६।।
रविभक्तिर्भवेत्तस्य निर्विशङ्कं द्विजोत्तम।
चन्द्रेण संयुते केतौ कारकांशात् व्ययस्थिते ।।७७।।
कारकांश से बारहवें केतु चन्द्रमा से युत हो तो सूर्य का उपासक होता
है।।७७।।
शुक्रेण संयुते केतौ कारकांशात् व्ययस्थिते।
समुद्रतनयाभक्तिर्जायतेऽसौ समृद्धिमान् ।।७८।।
कारकांश से बारहवें केतु शुक्र से युत हो तो लक्ष्मी का उपासक
और धनी होता है।।७८।।
कुजेन स्कन्दभक्तो वा जायते द्विजसत्तम।
वैष्णवो बुधसौरिभ्यां गुरुणा शिवभक्तिमान् ।।७९।।
भौम से युत हो तो स्कंद (स्वामिकार्तिक) की भक्ति, बुध-शनि से युत
हो तो विष्णु का उपासक, गुरु से युत हो तो शिव का उपासक।।७९।।
राहुणा तामसीं दुर्गां भूतप्रेतादिसेवकृत्।
हेरम्बभक्तः शिखिना स्कन्दभक्तोऽथवा भवेत् ।।८०।।
राहु हो तो तामसी दुर्गा का और भूतप्रेतादि का सेवक होता है। केतु
हो तो गणेश वा स्कंद का उपासक।।८०।।
कारकांशात् व्यये शौरिः पापराशौ यदा भवेत्।
तदैव क्षुद्रदेवस्य भक्तिस्तस्य न संशयः ।।८१।।
कारकांश से बारहवें शनि पापग्रह की राशि में हो तो क्षुद्रदेवता का
उपासक।।८१।।
पापर्क्षेऽपि व्यये शुक्रस्तदापि क्षुद्रसेवकः।
कारकान्यूनभागो हि अमात्यो जायते ग्रहः ।।८२।।
बारहवें भाव में पापग्रह की राशि में शुक्र हो तो भी क्षुद्रदेवता का सेवक