बृहद्देशी (मतंग मुनि - राग-पद्धति का विश्व में सर्वप्रथम प्रतिपादक ग्रन्थ)

बृहद्देशी (मतंग मुनि - राग-पद्धति का विश्व में सर्वप्रथम प्रतिपादक ग्रन्थ)
The Brihaddeshi of Sri Matanga Muni
मतंग मुनि (सम्पादक: के. साम्बशिव शास्त्री) द्वारा
DevanagariSanskritpublished175 पृष्ठ
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जातयः । ७९
अस्यां गान्धारो न्यासः । ऋषभपञ्चमावपन्यासौ ।
प्रस्तारः — पामपमधन धपगाधानी (१) । सनिधापापा
पापापापा (२) । धानीसासा मामापापा (३) । नीनीनीनी
नीनीनीनी (४) । नीनीधपमा निधनिधपापा (५) । पापा-
रीरी रीरीपापा (६) । मारिगासाध नीनीनीनी (७) ।
नीरीसारिस रीरीरीरी (८) । नीगासानिग सानीनीनी (९) ।
नीमां नीमां पापागांगां (१०) । गांपांमांपा नीनीनीनी (११) ।
मापामापरि गागागागा (१२) । नीनीपाधा नीगांगांगां (१३) ।
नीनीनीनी नीनीनीनी (१४) । मांमांधानी सनिधपापा (१५) !
मांपांमांपरि । गांगांगांगां (१६) । गान्धारपञ्चमी ॥
अन्ध्रा (मङ्गा ? मंशा) निरगपा रिगयोर्