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सर्वकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

पृष्ठ 669, कुल 737 में से

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पृष्ठ 669

( २८५ )
असकृन्मांदे^१ तत्फलमाद्यसमं^३ नात्र कर्णोस्मात्^४ ।
प्रतिपादनार्थमुच्चं^२ प्रकल्पितं ग्रहगतेस्तथा पातः ॥ २६ ॥
भुक्तेरूनाधिकनामानस्यच भवति कर्णवशात् ।
कक्ष्या^३ व्यासाद्धर्धगुणा मंडललिप्ता विभाजिताकर्णः ॥ ३० ॥
स्वकलाकर्णेन गुणः कर्णस्त्रिज्याहतः^१ स्पष्टः ।
मह्दहन^२ जलमयानं^४ विष्कंभो योजनैः कनेंदुना^३ ॥ ३१ ॥
२६. (घ) १. असकृन्मां (ग)^१ असकृन्मान्धे for (असकृत् मांदे)
२. प्रतिपदेनार्थमुच्चं for (प्रतिपादनार्थमुच्चं)
(ग) ३. सम for (ममं)
४. कर्णोस्मात् ॥ २६ ॥ (ङ) for (कर्णोस्मात्)
इस श्लोक का उत्तरार्ध, ३० वें श्लोक का पूर्वार्ध है ।
(च) १. असकृन्मांदे for (असकृत्मांदे)
४. कर्णोस्मात् for (कर्णोस्मात्)
(ङ) २. असकृन्मान्दे for (असकृत्मांदे)
३०. (घ) १. तामानस्य (ग) for (नामानस्य)
(ग) २. व स्यात् ॥ ३० ॥ for (वशात्)
३. कक्षा (ङ) for (कक्ष्या)
इस श्लोक का उत्तरार्ध, ३१ वें श्लोक का पूर्वार्ध है ।
(च) १. तामानस्य for (नामानस्य)
(ङ) १. रूनाधिकता for (रूनाधिकना)
४. + इति स्फुटगतिवासना +
३१. (घ) १. हृतः (ग) हृतस्पष्टः ॥ ३१ ॥ for (हतः)
२. मृद्दहन (ग) (ङ) for (मह्दहन)
३. किनेन्दूनाम् (ग) केनेदूनाम् for (कनेंदुना)
(ग) ४. मायानां for (मयानं)
इस श्लोक की दूसरी पंक्ति अगले श्लोक की पहली पंक्ति है ।
(च) हृतः for (हतः)
२. मृद्दहन (ङ) for (मह्दहन)
४. जलमयानां (ङ) for (जलमयानं)
३. किनेंदुनां for (कनेंदुना)
(ङ) ५. विष्कंभो for (विष्कंभा)
३. द्विनेंदूनां for (कनेंदुना)