ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
पृष्ठ 668, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ें( २८४ )
स्पष्टं१ तन्मध्यांतरमृणं धनं वा तप्तो२ मध्ये ।
कोटिफलं व्यासाद्धोत्पदयोराद्यं तयो भवत्युपरि३ ॥ २६ ॥
द्वित्तीययोर्यतोऽधस्ताष्टाक्तोनं१ तरतः२ कोटिः३ ।
कर्णस्तद्भुजफलकृतिसंयोग४ पदं तदुद्धृता त्रिज्या ॥ २७ ॥
भु६जफल गुणिताप्तधनु गुणि१ते चैवं२ फलं शीघ्रं ।
त्रिज्याभक्तः३ कर्णः परिधिगुणे४ बाहुकोटिः गुणाकारः५ ॥ २८ ॥
२६. (घ) १. अष्टं for (स्पष्टं)
२. ततो (ग) गृहे मध्ये ।। २६ ।। for (तप्तो मध्ये)
३. भंवत्युपरि (ग) (च) (ङ) for (भवत्युपरि)
(ग) इस श्लोक की पहली पंक्ति २६ वें श्लोक की दूसरी पंक्ति है।
इस श्लोक की दूसरी पंक्ति २७ वें श्लोक की पहली पंक्ति हैं—
(च) २. ततो for (तप्तो)
(ङ) दे० वि० नोट २५ वें श्लोक के अन्तर्गत टिप्पणी में।
२. गृहे मध्ये for (तप्तो मध्ये)
२७. (घ) १. तद्युक्तोनं (ङ) for (ताष्टक्तोनं) २. ततः (ङ) for (तरतः)
(ग) ३. कोटिः ।। २७ ।। (ङ) for (कोटिः)
(वि०— इस श्लोक की दूसरी पंक्ति— २८ वें श्लोक की प्रथम पंक्ति है—
४. फलसंयोगं for (फलकृति संयोग)
(च) १. ऽधस्तद्युक्तोनं for (ऽधस्ताष्टाक्तोनं)
२८. (घ) १. धनुर्गुणिते for (धनुगुणिते) (ग) गंणितेनैवं फलं शीघ्रं ।। २८ ।।
२. नैवं for (चैवं)
३. विज्या for (त्रिज्या)
४. गुणो (ग) (ङ) for (गुणे)
५. गुणकारः (ग) (ङ) for (गुणाकारः)
(ग) इस श्लोक की पहली पंक्ति २८ वें श्लोक की द्वितीय पंक्ति है।
६. भुजफ for (भुजफल) ७. कोटि (ङ) for (कोटिः)
(च) १. गुंणिते for (गुणिते) ४. परिधोगुणो for (परिधिगुणे)
७. कोटि for (कोटिः) ५. गुणकारः for (गुणाकारः)
(ङ) १. धनुर्गुणिते for (धनुगुणिते) २. नैवं for (चैवं)