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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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दिग्पालादि शिवलोकान्तर वर्णन ] [ ४८१

सज्जकार्मुकहस्तश्च सर्वदा वर्तते मुने ।
त्रिकोणे कथिता रुद्रास्त्रय एव घटोद्भव ॥५॥
हिरण्यबाहु सेनानीर्दिशांपतिरथापरः ॥६॥
वृक्षाश्च हरिकेशाश्च तथा पशुपतिः परः ।
शष्पिञ्जरस्त्वषीमांश्च पथीनां पतिरेव च ॥७॥

श्री अगस्त्यजी ने कहा—षोडशावरण चक्र क्या वह रुद्र के अधिदैवत वाला है। वहां पर संस्थित रुद्र कौन है और किस नाम से प्रकीत्तित हैं ।१। ।२। और किन आवरण विष्ठों में किस नामों वाले निवास किया करते हैं ? हे कृपानिधे ! उनका यौगिक और रूढिक नाम आप मुझे बतलाइये ।२। श्री हयग्रीवजी ने कहा—वहां पर तीन रुद्र कहे गये हैं—मुक्ता जातक में निर्मित हैं। उसकी संख्या और आयाम से शोभित पाँच योजन का विस्तार है ।३। मध्यपीठ मनोहर सोलह आवरणों से युक्त है। मध्य में जो पीठ है जो जाज्वल्यमान मन्यु (क्रोध) वाले और तीन लोचनों से समन्वित हैं ।४। हे मुने ! वह सर्वदा सुसज्जित कार्मुक से हाथ में लेकर विद्यमान रहा करते हैं। हे घटोद्भव ! त्रिकोण में तीन ही रुद्र कहे गये हैं ।५। एक तो हिरण्य बाहु हैं—दूसरे सेनानी हैं और तीसरे का नाम दिशांपति है ।६। तथा वृक्ष-हरिकेश और तीसरे पशुपति हैं। शष्पिञ्जर—त्विषीमान् और पथीनां पति है ।७।

एते षट्कोणगाः किं च बभ्रुशास्त्वष्टकोणके ।
विव्याध्यन्नपतिश्चैव हरिकेशोपवीतिनौ ॥८॥
पुष्टानां पतिरप्यन्यो भवो हेतिस्तथैव च ।
दशपत्रे स्वावरणे प्रथमो जगतां पतिः ॥९॥
रुद्रातताविनी क्षेत्रपतिः सूतस्तथापरः ।
अहं त्वन्यो वनपती रोहितः स्थपतिस्तथा ॥१०॥
वृक्षाणां पतिरप्यन्यश्चैते सज्जशरासनाः ।
मन्त्री च वाणिजश्चैव तथा कक्षपतिः परः ॥११॥
भवन्तिस्तु चतुर्थः स्यात्पञ्चमो वाग्विदस्ततः ।
ओषधीनां पतिश्चैव षष्ठः कलशसंभव ॥१२॥