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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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४४६ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

की ऊँचाई एक योजन आश्रित है। आधी गव्यूति के विस्तार वाले प्रति द्वार में दो किवाड़ हैं। ३७। वे एक योजन उन्नद्ध हैं तथा कृष्ण लौह के द्वारा बने हुए हैं। उन दोनों में एक अर्गला है जो आधे कोश के बराबर आयत है। ३८। इस प्रकार से चारों द्वारों में समान ही कीर्तित है। हे कुम्भसम्भव ! गोपुर का संस्थान मैं कहता हूँ । ३६। पूर्व में कहे हुए शाल के मूल में जो योजन समित है। दोनों पार्श्वों में दो-दो योजन लाकर निर्मित किये गये हैं । ४०। विस्तार भी द्वारों से युक्त उतना ही सम्प्राप्त है। दोनों पार्श्व मध्य में दो योजन हैं जो शाल का योजन है ।४१। हे मुने ! प्रमाण से पाँच योजन मिलाकर दोनों पार्श्व ढाई कोश से संयुत हैं ।४२।

मेलयित्वा पञ्चसंख्यायोजनान्यायतस्तथा ।
एवं प्राकारतस्तत्र गोपुरं रचितं मुने ॥४३
तस्माद्गोपुरमूलस्य वेष्टो विंशतियोजनः ।
उपर्युपरि वेष्टस्य ह्रास एव प्रकीर्त्यते ॥४४
गोपुरस्योन्नतिः प्रोक्ता पञ्चविंशतियोजना ।
योजने योजने द्वारं सकपाटं मनोहरम् ॥४५
भूमिकाश्चापि तावन्त्यो यथोर्ध्वं ह्राससंयुताः ।
गोपुराग्रस्य विस्तारो योजनं हि समाश्रितः ॥४६
आयामोऽपि च तावान्वै तत्र त्रिमुकुटं स्मृतम् ।
मुकुटस्य तु विस्तारः क्रोशमानो घटोद्भव ॥४७
क्रोशद्वयं समुन्नद्धं ह्रासं गोपुरवन्मुने ।
मुकुटस्यांतरे क्षोणी क्रोशार्धेन च संमिता ॥४८
मुकुटं पश्चिमे प्राच्यां दक्षिणे द्वारगोपुरे ।
दक्षोत्तरस्तु मुकुटाः पश्चिमद्वारगोपुरे ॥४९

मिलाकर पाँच योजन आयत है। इस प्रकार से वहाँ पर हे मुने ! गोपुर की रचना की गई ।४३। इस कारण से गोपुर के मूल का वेष्ट बीस योजनों वाला है। उस वेष्ट के ऊपर-ऊपर में ह्रास बताया जाता है ।४४। उस गोपुर की ऊँचाई पच्चीस योजन की है ऐसा कहा गया है। एक-एक