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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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भंडासुर वध वर्णन ] [ ४०६

वह युद्ध धनुष की डोरी की टंकारों और हुङ्कारों से अत्यन्त भीषण हो गया था। तूणीर से निकालकर खींचे हुए धनुषों से छोड़े गये महान् भयंकर बाणों से जो युद्ध में प्राणों के हरण करने वाले थे वह रण बहुत ही भयानक था ।५७। शरों के छोड़ने में महाराज्ञी के कर कमलों का व्यापार हाथ की सफाई के वेग से कुछ भी नहीं जाना गया था । हे कुम्भ सम्भव ! संग्राम में जो हुआ था उस सबको मैं बतलाऊँगा—आप श्रवण कीजिए ।५८। वे बाण ऐसे थे कि सन्धान के समय में एक ही प्रकार का था—वही चाप से निकलने पर दश प्रकार का हो जाता था—गगन में सौ प्रकार का—दैत्यों की सेना में प्राप्त होने पर सहस्र प्रकार का होना था और दैत्यों के अङ्गों के संगम में सम्प्राप्त होकर करोड़ों प्रकार का हो जाता था ।५९। परान्धकार का सृजन करती हुई और रोदसी को शरों से भेदन करती हुई महाराज्ञी ने विशाल बाणों से प्रचण्ड के मर्मों का भेदन कर दिया था ।६०। भंड ने क्रोध से लाल नेत्रों को वहन करते हुए उस दैत्य ने बड़े भारी शरों के जालों की ललितेश्वरी के ऊपर वर्षा की थी ।६१। उसने अन्ध तामिस्र नाम वाले महास्त्र को छोड़ा था । महेश्वरी ने महातरणि बाण से उसको काट दिया था ।६२। महावीर भंड ने रण में पाखण्डास्त्र को छोड़ा था उसके निवारण के लिए जगदम्बा ने गायत्र्यस्त्र को छोड़ दिया था ।६३।

अन्धास्त्रमसृजद्भंडः शक्तिदृष्टिविनाशनम् ।
चाक्षुष्मतमहास्त्रेण शमयामास तत्प्रसः ॥६४॥
शक्तिनाशाभिधं भंडो मुमोचास्त्रं महारणे ।
विश्वावसोर्वास्त्रेण तस्य दर्पमपाकरोत् ॥६५॥
अन्तकास्त्रं ससर्जाच्चैः संक्रुद्धो भंडदानवः ।
महामृत्युञ्जयास्त्रेण नाशयामास तद्बलम् ॥६६॥
सर्वास्त्रस्मृतिनाशाख्यमस्त्रं भंडो व्यमुञ्चत ।
धारणास्त्रेण चक्रेशी तद्बलं समनाशयत् ॥६७॥
भयास्त्रमसृजद्भंडः शक्तीनां भीतिदायकम् ।
अभयंकरमैन्द्रास्त्रं मुमुचे जगदम्बिका ॥६८॥
महारोगास्त्रमसृजच्छक्तिसेनासु दानवः ।
राजयक्ष्मादयो रोगास्ततोऽभूवन्सहस्रशः ॥६९॥