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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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भंडासुर वध वर्णन ] [ ४०३

पतियों के सहित जिनमें कुटिलाक्ष भी आगे थे वह चला था ।१७। सब सेना-
पतियों का स्वामी कुटिलाक्ष के साथ वह क्रोध से युक्त हुआ था भंड को भी
मिलाकर चालीस चमूवर थे ।१८। इनके आयुध परम दीप्त थे और इनके
केश भी दीप्त थी ऐसे दीप्त कंकट वाले निकल गये थे दो सहस्र अक्षौहिणी
सेना थी और पराधिक पिशाची थीं ।१९। शत्रु का मंथन करने को एक ही
साथ उसके पीछे गये थे । भंडासुर के निकल कर जाने पर जो सभी सेनाओं
से संकुल थी ।२०। उस शून्यक नगर में केवल स्त्रियाँ ही रह गयी थीं ।
आभिल नामक दैत्येन्द्र जो रथवर्य और महारथी था एक सहस्र युज्य सिंहों
से युक्त रथ पर रणोद्धत होकर सवार हुआ था ।२१।

सत्वरे विज्ज्वलज्वालाकालाग्निरिव दीप्तिमान् ।
घातको नाम वै खड्गश्चन्द्रहाससमाकृतिः ॥२२
इतस्ततश्चलंतीनां सेनानां धूलिरुत्थिता ।
वोढुं तासां भरं भूमिरक्षमेव दिवं ययौ ॥२३
केचिद्भूमेरपर्याप्तां प्रलेलुर्व्योमवर्त्मना ।
केषांचित्स्कन्धमारूढाः केचिच्चेलुर्महारथाः ॥२४
न दिक्षु न च भूचक्रे न व्योमनि च ते ममुः ।
दुःखदुखेन ते चेलुरन्योन्याश्लेषपीडिताः ॥२५
अत्यन्त सेनासंमर्दाद्रथचक्रैर्विचूर्णिताः ।
केचित्पादेन नागानां मर्दिता न्यपतन्भुवि ॥२६
इत्थं प्रचलिता तेन समं सर्वैश्च सैनिकैः ।
वज्रनिष्पेषसदृशो मेघनादो व्यधीयत ॥२७
तेनातीव कठोरेण सिंहनादेन भूयसा ।
भंडदैत्यमुखोत्थेन विदीर्णमभवज्जगत् ॥२८

वह जलती हुई ज्वाला वाले कालाग्नि के तुल्य ही दीप्ति वाला था ।
उसके खड्ग का नाम घातक था जो चन्द्रहास खड्ग के ही समान आकृति
वाला था ।२२। इधर-उधर चलने वाली सेनाओं से धूलि उड़कर ऊपर उठ
गयी थी । मानों भूमि उन सेनाओं के भार को सम्हालने में असमर्थ होकर
ही आकाश में जा रही थी ।२३। उनमें कुछ तो भूमि पर स्थान न पाकर