सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

पृष्ठ 811, कुल 893 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 811

भंडासुर वध वर्णन ] [ ४०१

सिद्धियों के प्रदान करने वाला है ।४। वैषुवायन कालों में और पुण्य समयों
में यह सिद्धि के देने वाला— सब पापों का विनाशक और पञ्च पर्वों में
कीर्त्ति का दाता है ।५। उस समय में रण में अपने सहोदरों को मरे हुए
सुनकर भंड महान् शोक से समाविष्ट हो गया था और उस भंडासुर ने बड़ा
भारी विलाप किया था ।६। विकीर्ण केशों वाला वह मूच्छित होकर भूमि
पर गिर गया था और भाइयों के दुःख से कशित होकर कुछ भी आश्वासन
उसने प्राप्त नहीं किया था ।७।

पुनः पुनः प्रलपन्कुटिलाक्षेण भूरिशः ।
आश्वास्यमानः शोकेन युक्तः कोपमवाप सः ॥८
फालं वहन्नतिक्रूरं भ्रमद्भ्रुकुटिभीषणम् ।
अंगारपाटलाक्षश्च निःश्वसन्कृष्णसर्पवत् ॥९
उवाच कुटिलाक्षं द्राक्समस्तपृतनापतिम् ।
क्षिप्रं मुहुर्मुहुः स्पृष्ट्वा धुन्वानः करवालिकाम् ॥१०
क्रोधहुंकारमातन्वन्गर्जन्नुत्पातमेघवत् ॥११
ययैव दृष्ट्या मायाबलाद्युद्धे विनाशिताः ।
भ्रातरो मम पुत्राश्च सेनानाथाः सहस्रशः ॥१२
तस्याः स्त्रियाः प्रमत्तायाः कण्ठोत्थैः शोणितद्रवैः ।
भ्रातृपुत्रमहाशोकवह्निं निर्वापयाम्यहम् ॥१३
गच्छ रे कुटिलाक्ष त्वं सज्जीकुरु पताकिनीम् ।
इत्युक्त्वा कठिनं वर्म वज्रपातसहं महत् ॥१४

वह बार-बार प्रलविलाप कर रहा था तब कुटिलाक्ष ने उसको
आश्वासन दिया था । जब बहुत कुछ समझाया तो शोक से युक्त उसने क्रोध
किया था ।८। उसने अत्यन्त क्रूर फाल को ग्रहण किया था और अपनी
भ्रुकुटियों को तिरछी करके बहुत ही भीषण हो गया था । उसकी आँखें
अङ्गारों के समान रक्त हो गयी थीं और वह काले सर्प की तरह फुङ्कारें
मार रहा था ।९। फिर सब सेनाओं के स्वामी कुटिलाक्ष से शीघ्र ही बोला
था और बार-बार खड्ग को छूकर उसे घुमाता जा रहा था ।१०। वह क्रोध
से हुङ्कार कर रहा था और उत्पात के समय में होने वाले मेघों के समान