संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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करने वाले सेनानियों के ये नाम हैं ।२६। सुनिए, आपकी सहायता के कार्य
में जो भी हैं वे पूर्ण सावधान होंगे । पहिला मदनक नामक है-दूसरा दीर्घ
जिह्व है ।२७। हुबक-हुलु मुलु-कक्लस-कल्क वाहन-थुक्लस-पुण्ड्र-
केतु चण्ड बाहु-कुक्कुर ये सब नामों वाले होंगे ।२८।
जम्बुकाक्षो जंभनश्च तीक्ष्णशृङ्गस्त्रिकंटकः ।
चन्द्रगुप्तश्च पंचेते दश चोक्ताश्चमूवराः ॥२९
एकैकाक्षौहिणीयुक्ताः प्रत्येकं भवता सह ।
आगमिष्यन्ति सेनान्यो दमनाद्या महाबलाः ॥३०
परस्य कटकं नैव यथा जानाति ते गतिम् ।
तथा गुप्तसमाचारः पाष्णिग्राहं समाचर ॥३१
अस्मिन्कार्ये सुमहतां प्रौढिमानं समुद्वहन् ।
विषंग त्वं हि लभसे जयसिद्धिमनुत्तमाम् ॥३२
इति मंत्रितमंत्रोऽयं दुर्मंत्री भंडदानवः ।
विषंगं प्रेषयामास रक्षितं सैन्यपालकैः ॥३३
अथ श्रीललितादेव्याः पाष्णिग्राहकृतोद्यमे ।
युवराजानुजे दैत्ये सूर्योऽस्तगिरिमाययौ ॥३४
प्रथमे युद्धदिवसे व्यतीते लोकभीषणे ।
अंधकारः समभवत्तस्य बाह्यं चिकीर्षया ॥३५
जम्बुकाक्ष-जंभन-तीक्ष्णशृंग-त्रिकण्टक-और चन्द्रगुप्त ये पन्द्रह
श्रेष्ठ सेनानी हैं ।२९। ये सब एक-एक अक्षौहिणी सेना से समन्वित होकर
आपके साथ रहेंगे। महान बल वाले दमन प्रभृति भी सेनानी गण आयेंगे
।३०। तुम्हारी गति को शत्रु की सेना जिस तरह से न जान पावे उसी भाँति
परम गुप्त समाचरण वाला होकर पाष्णिग्राह का समाचरण करो ।३१। इस
कार्य में महान पुरुषों की प्रौढ़ता का उद्वहन करते हुए ही हे विषंग ! परम
उत्तम जय सिद्धि को प्राप्त करोगे ।३२। दुर्मन्त्रणा वाले उस भंड ने इस
तरह से ऐसी मन्त्रणा करते हुए सैन्य पालकों के द्वारा रक्षित करके विषंग
को भेजा था ।३३। इसके अनन्तर श्री ललिता देवी के पाष्णिग्राह के उद्योग