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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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८४ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

शास्ति नाम वाला कहा जाता है। हविष्मान्-पौलह-श्रीमान्-सुकीर्ति-भार्गव-
आयोमूर्त्ति-आग्नेय-वसिष्ठ-अपव-पौलस्त्य-अप्रति म-गाभाग-काश्यप।६६-७०।
अभिमन्युश्चांगिरसः सप्तैते परमर्षयः ।
सुक्षेत्रश्चोत्तमो जाश्चाश्च वीर्य्यवान् ॥७१
शतानीको निरामित्रो वृषसेनो जयद्रथः ।
भूरिद्युम्नः सुवर्चाश्च दशैते मानवाः स्मृताः ॥७२
एकादशे तु पर्याये सावर्णे वै तृतीयके ।
निर्वाणरतयो देवाः कामगा वै मनोजवाः ॥७३
गणास्त्वेते त्रयः ख्याता देवतानां महात्मनाम् ।
एकैकस्त्रिंशतस्तेषां गणस्तु त्रिदिवौकसाम् ॥७४
मासस्याहानि त्रिंशत्तु यानि वै कवयो विदुः ।
निर्वाणरतयो देवा रात्रयस्तु विहंगमा ॥७५
गणस्तृतीयो यः प्रोक्तो देवतानां भविष्यति ।
मनोजवा मुहूर्त्तास्तु इति देवाः प्रकीर्तिताः ॥७६
एते हि ब्रह्मण पुत्रा भविष्या मानवाः स्मृताः ।
तेषामिन्द्रो वृषा नाम भविष्यः सुरराट् ततः ॥७७

अभिमन्यु—आङ्गिरस—ये सात परम ऋषि अर्थात् सर्वोत्तम सात ऋषि हैं। सुक्षेत्र—उत्तमो जा—भूरिसेन—वीर्यवान्—शतानीक—निरामित्र—वृषसेन—जयद्रथ—भूरिसेन—सुवर्चा—ये दश मानव कहे गये हैं ।७१-७२। एकादश पर्याय में तीसरे सावर्ण में निर्माण रति वाले देवगण हैं जो स्वेच्छा से गमन करने वाले हैं और मन के ही तुल्य वेग से समन्वित हैं ।७३। महान् आत्माओं वाले देवताओं वाले देवताओं के ये तीन गण विख्यात हैं। उन स्वर्गवासियों एक-एक तीन सौ गण हैं।७४। एक मास के तीस होते हैं जिनको कविगण जानते हैं। निर्माण (मोक्ष) में रति अर्थात् अनुराग रखने वाले हैं और रात्रियां तो विहङ्गम (पक्षी) हैं।७५। तीसरा गण जो कहा गया है वह देवताओं का होगा। मन के वेग और मुहूर्त्त—ये देव कीर्तित किये गये हैं ।७६। ये सब ब्रह्माजी के पुत्र होने वाले हैं जो कि मानव कहे गये हैं। फिर उनका इन्द्र वृषा नाम वाला सुरराट् होने वाला है ।७७।