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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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भार्गव-चरित्र (२) ] [ ३०१

गजानां बृंहितै राजन्व्याप्तं गगनमंडलम् ।
मार्गे ददर्श राजेंद्रो विपरीतानि भूपते ॥२६
शकुनानि रणे तस्य मृत्युदौत्यकराणि च ।
मुक्तकेशां छिन्ननासां रुदतीं च दिगंबराम् ॥३०
कृष्णवस्त्रपरीधानां वनितां स ददर्श ह ।
कुचेलं पतितं भग्नं नग्नं काषायवाससम् ॥३१
अंगहीनं ददर्शासौ नरं दुःखितमानसम् ।
गोधां च शशकं शल्यं रिक्तकुम्भं सरीसृपम् ॥३२
कार्पासं कच्छपं तैलं लवणं चास्थिखंडकम् ।
स्वदक्षिणे शृगालं च कुर्वतं भैरवं रवम् ॥३३
रोगिणं पुल्कसं चैव वृषं च श्येनभल्लुकौ ।
दृष्ट्वापि प्रययौ योद्धुं कालपाशावृतो हठात् ॥३४
नर्मदोत्तरतीरस्थो ह्यकृतव्रणसंयुतः ।
वटच्छायासमासीनो रामोऽपश्यदुपागतम् ॥३५

हे राजन् ! हाथियों की चिघाड़ों से सम्पूर्ण गगन मण्डल भर कर गूँज गया था । हे भूपते ! जिस समय वह राजेन्द्र अपनी महती सेना को लेकर परशुराम से युद्ध करने के लिए गमन कर रहा था उस समय में मार्ग में विपरीत बहुत से शकुन देखे थे जो कि रण स्थल में मृत्यु के होने की सूचना देने वाले दूतों के ही समान थे । यहाँ से आगे उन बुरे असगुनों के विषय में बतलाया जाता है जो-जो उस राजा ने मार्ग में देखे थे-उस राजा ने एक ऐसी नारी को देखा था जो अपने शिर के केशों को खोले हुई थी-वह रुदन कर रही थी और बिल्कुल नग्न थी ।२६-३०। वह काले वर्ण का परिधान की हुई थी । इसका तात्पर्य यह है कि ऐसी स्त्री मार्ग में मिले तो बड़ा ही बुरा सगुन है । ऐसा पुरुष भी यदि मिल जाये तो वह भी बुरा सगुन है जैसा उस कार्त्तवीर्य ने देखा था । उसे एक ऐसा पुरुष दिखाई दिया था जो बहुत ही मैले-कुचैले वस्त्र पहिने हुए था-भूमि पप पड़ा था-उनका शरीर जीर्ण-शीर्ण था और काषाय (गेरुआ) रङ्ग के वस्त्र धारण किये हुए था ।३१। वह पुरुष अङ्गों से हीन था और उनके मन में बड़ा ही