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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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१४६ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

मैं समचित और आत्मा वाला हूँ और यहाँ पर सञ्चरण किया करता हूँ
।१८। मैं सब प्राणियों के साथ समान व्यवहार करने वाला हूँ और मेरे कोई
भी माता-पिता आदि नहीं हैं। मैं कहीं पर भी अभक्ष्य-अगम्य और अपेय
आदि वस्तुओं में स्वतन्त्रता से उनका सेवन करने वाला हूँ ।१९। कृत्य और
अकर्त्तव्य कार्यों की विधि में मेरी कुछ भी विशेषता वाली बुद्धि नहीं है।
किसी के भी निवास स्थान पर मैं अभिगमन करने वाला नहीं हूँ ।२०। इन्द्र
के भी बल से मैं नहीं डरता हूँ—इसमें लेशमात्र भी संशय नहीं है। सभी
लोग इस बात को भली भांति जानते हैं कि यह स्थल मेरे ही आश्रय वाला
है अर्थात् यहाँ पर केवल मैं ही रहा करता हूँ ।२१।

तस्मान्न कश्चिदायाति ममात्रानुमतिं विना ।
इत्येष मम वृत्तान्तः कार्त्स्न्येन कथितस्तव ॥२२
त्वं च मे ब्रूहि तत्त्वेन निजवृत्तमशेषतः ।
कस्त्वं कस्मादिहायातः किमर्थमिहाधिष्ठितः ।
उद्यतोऽन्यत्र वा गंतुं किं वा तव चिकीर्षितम् ॥२३
वसिष्ठ उवाच—इत्येवमुक्तः प्रहसंस्तेन रामो महाद्युतिः ।
तूष्णीं क्षणमिव स्थित्वा दध्यौ किंचिदवाङ्मुखः ॥२४
कोऽयमेव दुराधर्षः सजलाम्भोदनिस्वनः ।
ब्रवीति च गिरोऽत्यर्थं विस्पष्टार्थपदाक्षराः ॥२५
किं तु मे महतीं शंकां तनुरस्य तनोति वै ।
विजातिसंश्रयत्वेन रमणीया यथा शराः ॥२६
एवं चिंतयतस्तस्य निमित्तानि शुभानि वै ।
बभूवुर्भुवि देहे च स्वाभिप्रेतार्थदान्यलम् ॥२७
ततो विमृश्य बहुशो मनसा भृगुपुंगवः ।
उवाच शनकैर्व्याधं वचनं सूनृताक्षरम् ॥२८

इस कारण से मेरी अनुमति के बिना यहाँ पर कोई भी नहीं आया
करता है। यही मेरा वृत्तान्त है जो पूर्णतया तुम्हारे सामने मैंने कह दिया
है ।२२। और अब आप अपना पूरा हाल तात्त्विक रूप से मुझे बतलाइए।
आप कौन हैं—किस कारण से यहाँ पर समागत हुए हैं और किस प्रयोजन