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सर्वकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

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चतुर्युगाख्यान वर्णनम् ] [ ११५

में प्रजाओं में भ्रूणों की अर्थात् गर्भस्थ शिशुओं की हत्याएं बैर के कारण
हुआ करेगी । इसी कारण से कलियुग को प्राप्त करके लोगों की आयु-बल
विक्रम तथा रूप का सौन्दर्य सभी नष्ट हो जाया करते हैं ॥७०॥
तदा चाल्पेन कालेन सिद्धिं गच्छन्ति मानवाः ।
धन्या धर्मं चरिष्यन्ति युगान्तो द्विजसत्तमाः ॥७१
श्रुतिस्मृत्युदितं धर्मं ये चरंत्यनसूर्यकाः ।
त्रेतायामाब्दिको धर्मो द्वापरे मासिकः स्मृतः ॥७२
यथाशक्ति चरन्प्राज्ञस्तदह्ना प्राप्नुयात्कलौ ।
एषा कलियुगावस्था संध्यांशं तु निबोधत ॥७३
युगे युगे तु हीयंते त्रित्रिपादास्तु सिद्धयः ।
युगस्वभावात्संध्यासु तिष्ठन्तीह तु यादृशः ॥७४
संध्यास्वभावाः स्वांशेषु पादशेषाः प्रतिष्ठिताः ।
एवं संध्यांशके काले संप्राप्ते तु युगांतिके ॥७५
तेषां शास्ता ह्यसाधूनां भृगूणां निधनोत्थितः ।
गोत्रेण वै चन्द्रमसो नाम्ना प्रमतिरुच्यते ॥७६
माधवस्य तु सांशेन पूर्वं स्वायंभुवेऽन्तरे ।
समाः स विंशतिः पूर्णाः पर्यटन्वै वसुन्धराम् ॥७७

उस कलियुग में मनुष्य थोड़े समय में सिद्धि को प्राप्त कर लिया
करते हैं—इस युग की विशेषता है । इस युग के अन्त में वे मानव और
श्रेष्ठ द्विज परम धन्य हैं जो धैर्य का समाचरण किया करते हैं ॥७१॥ जो
अनिन्दित मानव श्रुति और स्मृतियों में कहे हुए धर्म का समाचरण किया
करते हैं । ऐसा धर्म त्रेतायुग में एक वर्ष में बलवान् एवं पूर्ण होता है वही
धर्म द्वापर में एक मास में साङ्ग सफल होता है और वही धर्म इस कलियुग
में अपनी शक्ति के अनुसार समाचरित होने पर एक ही दिन में प्राज्ञ प्राप्त
कर लिया करता है । यह कलियुग के समय की अवस्था है अब इस कलि
के सन्ध्या का अंश समझ लो ॥७२-७३॥ युग-युग में सिद्धियाँ तीन-तीन पाद
क्षीण हुआ करती हैं जैसा भी युग-स्वभाव से सन्ध्याओं में यहाँ पर स्थित रहा
करती हैं जैसा भी युग का स्वभाव हो ॥७४। उनके अपने अंशों में संध्या के