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सर्वकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 295, कुल 380 में से

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ग्रन्थचर्य-विज्ञान

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अब हम भादक द्रव्यों से होने वाली कतिपय हालियों का वर्णन करते हैं:—

भादक द्रव्य के खेलन से बुद्धि नष्ट हो जाती है, हृदय दुर्बल और निस्तेज हो जाता है, शरीर जर्जरित होने लगता है और कुकर्म में मन लगता है। आलस्य, अयुत्साह और क्रोध को बुद्धि होती है। वीर्य-नाश के लिये उत्तेजना मिलती है। भादक द्रव्य का भेमी पुरुष अग्नी, वरिद्र, दोषी, और तथा जुझारी हो जाता है। भादक द्रव्य से सब गुण नष्ट हो जाते हैं। आयु-वैल घट जाता है। इसके खेलन से समाज सदैव दास बना रहता है।

( ९ ) कुशिक्षा और कुसंग

“सङ्कात्संजायते कामः।”

( गीता )

विकारों के उत्पन्न होने वाले विषयों के सहवास से काम की उत्पत्ति होती है।

“कामिनां कामिनीनाञ्च, सङ्गारहामी भ “मुमान्।”

( बुद्धि )

कामी पुरुष या भोगवत्ती स्त्री के साथ रहने वाला भी कामी बन जाता है।

ग्रन्थचर्य के नाश करने वाले कारणों में कुशिक्षा और कुसङ्ग भी है।

आजकल की शिक्षा ऐसी अच्छी नहीं है जो कि बालकों को सच्चे से दूर रख सके। सौ में पचासी बालक निर्बल, दृष्टिहीन, धर्म-भ्रष्ट, अविचारी, गुप्त पापी और प्रमादी हो जाते हैं।