ब्रह्मवैवर्त पुराण
Brahma Vaivarta Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संक्षिप्त ब्रह्मवैवर्तपुराण
स्वप्नमें जिसके पैरोंमें बेड़ी पड़ गयी, उसे प्रतिष्ठा
और पुत्रकी प्राप्ति होती है। जो सपनेमें नदीके
किनारे नये अथवा फटे-पुराने कमलके पत्तेपर
दही मिला हुआ अन्न और खीर खाता है; वह
भविष्यमें राजा होता है। जलौका (जोंक), बिच्छू
और साँप यदि स्वप्नमें दिखायी दें तो धन, पुत्र,
विजय एवं प्रतिष्ठाकी प्राप्ति होती है। सींग और
बड़ी-बड़ी दाढ़वाले पशुओं, सूअरों और वानरोंसे
यदि स्वप्नमें पीडा प्राप्त हो तो मनुष्य निश्चय ही
राजा होता और प्रचुर धन-राशि प्राप्त कर लेता है।
जो स्वप्नमें मत्स्य, मांस, मोती, शङ्ख, चन्दन,
हीरा, शराब, खून, सुवर्ण, विष्ठा तथा फले-फूले
बेल और आमको देखता है; उसे धन मिलता है।
प्रतिमा और शिवलिङ्गके दर्शनसे विजय और
धनकी प्राप्ति होती है। प्रज्वलित अग्निको देखकर
मनुष्य धन, बुद्धि और लक्ष्मी पाता है। आँवला
और कमल धनप्राप्तिका सूचक है। देवता, द्विज,
गौ, पितर और साम्प्रदायिक चिह्नधारी पुरुष स्वप्नमें
परस्पर जिस वस्तुको देते हैं; उसका फल भी वैसा
ही होता है। श्वेत वस्त्र धारण करके श्वेत पुष्पोंकी
माला और श्वेत अनुलेपनसे सुसज्जित सुन्दरियाँ
स्वप्नमें जिस पुरुषका आलिङ्गन करती हैं, उसे
सुख और सम्पत्तिकी प्राप्ति होती है। जो पुरुष
स्वप्नमें पीत वस्त्र, पीले पुष्पोंकी माला और पीले
रंगका अनुलेपन धारण करनेवाली स्त्रीका आलिङ्गन
करता है; उसे कल्याणकी प्राप्ति होती है। स्वप्नमें
भस्म, रूई और हड्डीको छोड़कर शेष सभी श्वेत
वस्तुएँ प्रशंसित हैं और कृष्णा गौ, हाथी, घोड़े,
ब्राह्मण तथा देवताको छोड़कर शेष सभी काली
वस्तुएँ अत्यन्त निन्दित हैं।
रत्नमय आभूषणोंसे विभूषित दिव्य
ब्राह्मणजातीय स्त्री मुस्कराती हुई जिसके घरमें
आती है; उसे निश्चय ही प्रिय पदार्थकी प्राप्ति
होती है। स्वप्नमें ब्राह्मण देवताका स्वरूप है और
ब्राह्मणी देवकन्याका। ब्राह्मण और ब्राह्मणी संतुष्ट
हो मुस्कराते हुए स्वप्नमें जिसको कोई फल दें,
उसे पुत्र होता है। पिताजी! ब्राह्मण स्वप्नमें जिसे
शुभाशीर्वाद देते हैं, उसे अवश्य ऐश्वर्य प्राप्त होता
है। सपनेमें संतुष्ट ब्राह्मण जिसके घर आ जाय;
उसके यहाँ नारायण, शिव और ब्रह्माका प्रवेश
होता है; उसे सम्पत्ति, महान् सुयश, पग-पगपर
सुख, सम्मान और गौरवकी प्राप्ति होती है। यदि
स्वप्नमें अकस्मात् गौ मिल जाय तो भूमि और
पतिव्रता स्त्री प्राप्त होती है। स्वप्नमें जिस पुरुषको
हाथी सूँड़से उठाकर अपने माथेपर बिठा ले; उसे
निश्चय ही राज्य-लाभ होगा। स्वप्नमें संतुष्ट
ब्राह्मण जिसे हृदयसे लगाये और फूल हाथमें दे;
वह निश्चय ही सम्पत्तिशाली, विजयी, यशस्वी
और सुखी होता है। साथ ही उसे तीर्थस्नानका
पुण्य प्राप्त होता है।
स्वप्नमें तीर्थ, अट्टालिका और रत्नमय गृहका
दर्शन हो तो उससे भी पूर्वोक्त फलकी ही प्राप्ति
होती है। स्वप्नमें यदि कोई भरा हुआ कलश दे
तो पुत्र और सम्पत्तिका लाभ होता है। हाथमें
कुडव या आढक लेकर स्वप्नमें कोई वाराङ्गना
जिसके घर आती है; उसे निश्चय ही लक्ष्मीकी
प्राप्ति होती है। जिसके घर पत्नीके साथ ब्राह्मण
आता है; उसके यहाँ पार्वतीसहित शिव अथवा
लक्ष्मीके साथ नारायणका शुभागमन होता है।
ब्राह्मण और ब्राह्मणी स्वप्नमें जिसे धान्य, पुष्पाञ्जलि,
मोतीका हार, पुष्पमाला और चन्दन देते हैं तथा
जिसे स्वप्नमें गोरोचन, पताका, हल्दी, ईख और
सिद्धान्नका लाभ होता है; उसे सब ओरसे
लक्ष्मीकी प्राप्ति होती है। ब्राह्मण और ब्राह्मणी
स्वप्नावस्थामें जिसके मस्तकपर छत्र लगाते
अथवा श्वेत धान्य बिखेरते हैं या अमृत, दही
और उत्तम पात्र अर्पित करते हैं अथवा जो
स्वप्नमें श्वेत माला और चन्दनसे अलंकृत हो
रथपर बैठकर दही या खीर खाता है; वह
निश्चय ही राजा होता है। स्वप्नमें रत्नमय