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सर्वकोश
ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण

Brahma Vaivarta Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished810 पृष्ठ

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पृष्ठ 689

श्रीकृष्णजन्मखण्ड
६७९
सुस्वप्न-दर्शनके फलका विचार
नन्दजीने पूछा- प्रभो! किस स्वप्नसे कौन-
सा पुण्य होता है और किससे मोक्ष एवं सुखकी
सूचना मिलती है? कौन-कौन-सा स्वप्न शुभ
बताया गया है?
श्रीभगवान् बोले-तात! वेदोंमें सामवेद
समस्त कर्मोंके लिये श्रेष्ठ बताया गया है। इसी
प्रकार कण्वशाखाके मनोहर पुण्यकाण्डमें भी
इस विषयका वर्णन है। जो दुःस्वप्न है और जो
सदा पुण्यफल देनेवाला सुस्वप्न है, वह सब
जैसा पूर्वोक्त कण्वशाखामें बताया गया है; उसका
वर्णन करता हूँ, सुनो। यह स्वप्नाध्याय अधिक
पुण्य-फल देनेवाला है। अतः इसका वर्णन
करता हूँ। इसका श्रवण करनेसे मनुष्यको गङ्गास्नानके
फलकी प्राप्ति होती है। रातके पहले पहरमें
देखा गया स्वप्न एक वर्षमें फल देता है। दूसरे
पहरका स्वप्न आठ महीनोंमें, तीसरे पहरका
स्वप्न तीन महीनोंमें और चौथे पहरका स्वप्न एक
पक्षमें अपना फल प्रकट करता है। अरुणोदयकी
बेलामें देखा गया स्वप्न दस दिनमें फलद होता
है। प्रातःकालका स्वप्न यदि तुरंत नींद टूट जाय
तो तत्काल फल देनेवाला होता है। दिनको
मनमें जो कुछ देखा और समझा गया है, वह
सब अवश्य सपनेमें लक्षित होता है। तात!
चिन्ता या रोगसे युक्त मनुष्य जो स्वप्न देखता है,
वह सब निःसंदेह निष्फल होता है। जो जडतुल्य
है, मल-मूत्रके वेगसे पीड़ित है, भयसे व्याकुल
है, नग्न है और बाल खोले हुए है, उसे अपने
देखे हुए स्वप्नका कोई फल नहीं मिलता।
निद्रालु मनुष्य स्वप्न देखकर यदि पुनः नींद लेने
लग जाता है अथवा मूढ़तावश रातमें ही किसी
दूसरेसे कह देता है; तब उसे उस स्वप्नका फल
नहीं मिलता। किसी नीच पुरुषसे, शत्रुसे, मूर्ख
मनुष्यसे, स्त्रीसे अथवा रातमें ही किसी दूसरेसे
स्वप्नकी बात कह देनेपर मनुष्यको विपत्ति,
दुर्गति, रोग, भय, कलह, धनहानि एवं चोर-
भयका सामना करना पड़ता है।
व्रजेश्वर ! स्वप्नमें गौ, हाथी, अश्व, महल,
पर्वत और वृक्षोंपर चढ़ना, भोजन करना तथा
रोना धनप्रद कहा गया है। हाथमें वीणा लेकर
गीत गाना खेतीसे भरी हुई भूमिकी प्राप्तिका
सूचक होता है। यदि स्वप्नमें शरीर अस्त्र-शस्त्रसे
विद्ध हो जाय, उसमें घाव हों, कीड़े हो जायें,
विष्ठा अथवा खूनसे शरीर लिस हो जाय तो यह
धनकी प्राप्तिका सूचक है। स्वप्नमें अगम्या स्त्रीके
साथ समागम भार्याप्राप्तिकी सूचना देनेवाला है।
जो स्वप्नमें मूत्रसे भीग जाता, वीर्यपात करता,
नरकमें प्रवेश करता, नगर या लाल समुद्रमें
घुसता अथवा अमृत पान करता है; वह जगनेपर
शुभ समाचार पाता है और उसे प्रचुर धनराशिका
लाभ होता है। स्वप्नमें हाथी, राजा, सुवर्ण, वृषभ,
धेनु, दीपक, अन्न, फल, पुष्प, कन्या, छत्र, ध्वज
और रथका दर्शन करके मनुष्य कुटुम्ब, कीर्ति
और विपुल सम्पत्तिका भागी होता है। भरे हुए
घड़े, ब्राह्मण, अग्नि, फूल, पान, मन्दिर, श्वेत
धान्य, नट एवं नर्तकीको स्वप्नमें देखनेसे लक्ष्मीकी
प्राप्ति होती है। गोदुग्ध और घीके दर्शनका भी
यही फल है। सपनेमें कमलके पत्तेपर खीर,
दही, दूध, घी, मधु और स्वस्तिक नामक
मिष्टान्न खानेवाला मनुष्य भविष्यमें अवश्य ही
राजा होता है। छत्र, पादुका और निर्मल एवं
तीखे खड्गकी प्राप्ति धान्य-लाभकी सूचना देती
है। खेल-खेलमें ही पानीके ऊपर तैरनेवाला
मनुष्य प्रधान होता है। फलवान् वृक्षका दर्शन और
सर्पका दंशन धन-प्राप्तिका सूचक है। स्वप्नमें सूर्य
और चन्द्रमाके दर्शनसे रोग दूर होता है। घोड़ी, मुर्गी
और क्रौञ्चीको देखनेसे भार्याका लाभ होता है।