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सर्वकोश
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 22, कुल 486 में से

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पृष्ठ 22

(१९)
सूत्र विषय पृष्ठ
२६-२७ विद्याकी प्राप्तिके लिये वर्णाश्रमोचित कर्मोंकी अपेक्षा
तथा शम-दम आदिकी अनिवार्य आवश्यकता ......... ३८७-३८९
२८-३१ प्राणसंकटके सिवा अन्य समयमें, आहार-शुद्धिविषयक
सदाचारके त्यागका निषेध ....................................... ३९०-३९२
३२-३३ ज्ञानीके लिये लोकसंग्रहार्थ आश्रमकर्मके अनुष्ठानकी
आवश्यकता .............................................................. ३९३
३४-३९ भक्तिसम्बन्धी श्रवण-कीर्तन आदि कर्मोंके अनुष्ठानकी
अनिवार्य आवश्यकता तथा भागवतधर्मकी महत्ताका
प्रतिपादन ................................................................ ३९४-४००
४०-४३ वानप्रस्थ, संन्यास आदि ऊँचे आश्रमोंसे वापस लौटनेका
निषेध, लौटनेवालेका पतन और ब्रह्मविद्या आदिमें
अनधिकार ............................................................... ४००-४०२
४४-४६ उद्गीथ आदिमें की जानेवाली उपासनाका कर्ता तो
ऋत्विक् है किंतु उसके फलमें यजमानका अधिकार है,
इसका वर्णन ........................................................... ४०३-४०४
४७-५० संन्यास, गृहस्थ आदि सब आश्रमोंमें ब्रह्मविद्याका
अधिकार ................................................................ ४०४-४०७
५१-५२ मुक्तरूप फल इस जन्ममें मिलता है या जन्मान्तरमें, इसी
लोकमें मिलता है या लोकान्तरमें ? इसका नियम नहीं है
यह कथन ............................................................... ४०८-४०९
चौथा अध्याय
पहला पाद
१-२ उपदेश-ग्रहणके पश्चात् ब्रह्मविद्याके निरन्तर अभ्यासकी
आवश्यकता .............................................................. ४१०-४११
३ आत्मभावसे परब्रह्मके चिन्तनका उपदेश ....................... ४११-४१२
४-५ प्रतीकमें आत्मभावनाका निषेध और ब्रह्मभावनाका विधान ४१२-४१३
६ उद्गीथ आदिमें आदित्य आदिकी भावना ......................... ४१४