वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya
भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 13, कुल 486 में से
संदर्भ में पढ़ें॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः॥
वेदान्त-दर्शन (ब्रह्मसूत्र)-के प्रधान विषयोंकी सूची
पहला अध्याय
पहला पाद
सूत्र विषय पृष्ठ
१-११ ब्रह्मविषयक विचारकी प्रतिज्ञा तथा ब्रह्म ही जगत्का
अभिन्न निमित्तोपादान कारण है, जडप्रकृति नहीं, इसका
युक्ति एवं प्रमाणोंद्वारा प्रतिपादन................................ २३-३१
१२-१९ श्रुतिमें 'आनन्दमय' शब्द परमात्माका ही वाचक है,
जीवात्मा अथवा जडप्रकृतिका नहीं, इसका समर्थन ....... ३२-३७
२०-२१ 'विज्ञानमय' तथा 'सूर्यमण्डलान्तर्वर्ती हिरण्मय पुरुष'
की ब्रह्मरूपताका कथन..................................... ३७-३८
२२-२७ 'आकाश', 'प्राण', ज्योति' तथा 'गायत्री' नामसे श्रुतिमें
परब्रह्मका ही वर्णन है, इसका प्रतिपादन................... ३८-४३
२८-३१ कौषीतकि श्रुतिमें भी 'प्राण' नामसे ब्रह्मका ही उपदेश
हुआ है, इसका समर्थन.................................... ४३-४६
दूसरा पाद
१-७ वेदान्त-वाक्योंमें परब्रह्मकी ही उपास्यताका निरूपण
तथा जीवात्माकी उपास्यताका निराकरण..................... ४७-५२
८ सबके हृदयमें रहते हुए भी परमात्मा जीवोंके सुख-
दुःखोंका भोग नहीं करता, इसका प्रतिपादन............... ५३
९-१० चराचरग्राही भोक्ता परमात्मा ही हैं, इसका निरूपण....... ५३-५४
११-१२ हृदयगुहामें स्थित दो आत्मा-जीवात्मा तथा परमात्माका
प्रतिपादन................................................... ५५-५६
१३-१७ नेत्रान्तर्वर्ती पुरुषकी ब्रह्मरूपता................................ ५७-६१