बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
परिशिष्ट (ग)
शब्दार्थ
'अ'
अठार—अठारह, प्रहारह । अडहव—अनोखा, अद्वितीय । अकुलीणीय—
अकुलीन । अवफर--अपशब्द । अगध—दोष । अछइ—है । अगुहार—अगुशारि,
अनुकरण करने वाला, समान । अरथ-अर्थ, धन । अस-ऐसा । अपहछ-
अपद छू, अपच्छ, अहितकर । अनइ-अरण-जाना, नाग, पानी । अम्हि-मेरे ।
अवली सवली-सजी धजी । अहिनाण-अभिज्ञान, चिन्ह । अरण—आदि ।
'आ'
आपणइ-अपने । आभर-आभरण-गहना । आपडीया-आँख । आहेटीय-
अहेरी । आखदियउ-आनन्दित हुआ । आगिला-आगे । आजणी-अजन ।
आवासइ-रहने का स्थान । आसजीयउ-आरुजिन्न-आसक्त । आगली-बढ कर,
अच्छी, सुन्दर । आल-दोषारोपण, आड, अवलम्ब । आखरी-तेज । आणि-
आनि-लाकर । आगलउ-आगे । आपि-ठमका—पलक मारते ही ।
'इ'
इसउ—ऐसे ।
"उ ऊ"
उलगाणा-प्रवासी । ऊलगइ-स्मरणीय । उछाह-उत्साह । उघरउ-उद्धार ।
उलीभ-उलीय-कुलीय-उभइइ-निकलता है, सान से निकलता है । उलग-
परदेश, प्रवास । उलगायउ-प्रवास के निमित्त । उचाय-उभय-त्याग देना,छोड़
देना । उछइ-उच्छइ-आच्छादित । उसीस-उस्सास-उच्छ्वास ( उस्रं प्रबल :
श्वास • उच्छ्वास : ) ऊँचा श्वास लेना । उमाईयउ-उमग पर । उलट्यउ-
उलट पडा हो । ऊतउ-वहा । उजला-उज्ज्वल । उसाकी-उसकी । उधर-उदर-
पेट । उमाहियउ-उम्भाहियउ-विनाथित । उलपउ-देख सकना । उशनइ-
उनको । उभादियउ-आवेगा । उबरउ-उसका, उनका । उरिआ-हृदय में ।
उमाही-उमग । उससाइ-उत्साह । उल्ली-गहरा रही है । उभलयउ-अच्छा ।
- २०३ -
चींत-चिन्ता । चतइ-चित्त । चंपीया-दबा हुआ। चउरी-चउरिया-शुभ मण्डप ।
चंडीयउ-प्रबल, उग्र । चउरासिया-विशिष्ट पदाधिकारी । चिन्तवइ-चिन्ता
करना, विचार करना । चऊथि-चतुर्थी ( गणेश चतुर्थी ) । चौरजउ-जिस
प्रकार चोर रखता है । चउपंडी-चार खण्ड, चार खण्ड का राजमहल ।
चीड़ीय-चिड़िया । चीरी-चिट्ठी । चउरा-चौपाल । चाउ-चादर ।
"छ"
छाइड-छाना। छुंडी-छोड़ दी । छिवणी-स्पर्श करना, छूना । छार-राख ।
छोड़ि-डाल दी । छोटीय-छोटी छाड़ई-छांट ।
"ज"
जूवा-जुव-तरुण । जइतूं-जो तू । जनम हूयउ-जन्म हुआ । जान-यान-
बारात । जोसि-ज्योतिषी-पण्डित । जोग-युक्ति । जूठउ-झूठा । जोगनी-
जोइणी-योगिनी (ये ६४ हैं) । जुइ (जुड़ई)-जुड़ जाते हैं । जिहा-जिस । जोइ
ज्योँ-देखना, खोजना । जइरि-यदि । जमडाढ़-तलवार । जुहारण-नमस्कार ।
जोड़इ-आरम्भ करना । जायता-जीवता । जाइ-जाता है, जाकर । ज-प्रमान ।
"झ"
झलवलइ-चमकना । झूग्ता-चिन्ता, झूरना, सूखना, पछताना, विलाप
करना । झुण कार-रुनझुन । झिगमिगइ-जगमगाना । झंपियउ-झांपना,
व्यथित हुआ । झीड़ई-पतली । झलकय-झलकती है, चमकती है । झलमलई-
चमकता है । झाल-ज्वाला । झुनाकउ-जूनागढ़ का ।
"ट"
टसकला मुसकला-घटकना, मटकना । टउरि-मैं जिस प्रकार । टेकि-
पकड़कर ।
"ठ"
ठअकती-ठुमकती चाल, रुक कर चलना । ठयइ-ठह्रइ-ठविय-रखता ।
ठाकुर-राजा । ठामोठामि-जगह-जगह । ठांइ-स्थान ।
"ड"
डालीयउ-फेंकना ।
~ १०६ ~
भाटपर-भागे-भाटपद । भाग-गर्थं । भुह-भूमि । भाइम-भाई । भत्तार-
स्वामी । भमर-भ्रमर-घूमता है । भीनउ-भीग गया । भयग्य-भाग्यवाद ।
"म"
- मुवि-मूंछें, मूर्ख । मंडिड-मोटा, गूँथा । मटिय-भग हुआ । मंगा-
मांग । मेकलह-मोसरग्य-प्रेरित, भेजा हुआ । मोकल्या-मोकल्य-मोकलवु
( गुजराती )-भेजना । मुझ-मेग, मेरो । म्हारइउ-मेरे यहां । म्हारइ-मेरे ।
मेलहउ-छोटा । मिलायउ-मिलागय, मिलायो । मुगवि-मुक्ति । मनइ-मनमें ।
मेगा-मेघों का समूह । माय-माइ-मातृ या, मातृ या पूजन । मांडहउ-मंडरा,
मंडप । मेल्था-मेलाय, मिलाप । मेलिह मेलह-छोड़ना । मज्न मेरुणि-नेदिनी ।
मारू-मारवाड़ । मउतउ-मौदकर निकाल, देर से निकाल । मेटउ-मुड,
संग्राम । माम-शामल ब्राह्मण सूचक अव्यय । महारि-महारिय-मेरा ।
महला महल-पीछा-मर्दान । मुदि मुह मुग्म-मुह करना । गहर-गटि-दूषित ।
म्हारी-मेरी । माहि-में । मेल्हाण-छोड़ना, परित्याग, छोड़ा । मशाण-श्मशान ।
गढिया-गढिय-रचित, लगाकर । भोनइ-मुझे, मुझको । मेलउ, मेलय-सम्बन्ध,
संयोग । मरेसि, मरेगा-मरेगी । मुया-मृतक । मिलण - मिलना । माजा-
मस्त । मङ्गल-मङ्गलित ।
'र'
रावलउ-राना का । रावली-राजाओं की। रति-ऋतु । रया-सुन्दर । रोस-
क्रोध । राजरउ-राजा के । रावडी-राबड़ी-शीश फूल । रिपग्यो-रखना ।
राउ-राजा । रावलइ-राजभवन, (अन्त पुर) । रवि-अग्नि, नायक सरदार ।
रोहणी-रोहिण-दिन का दूसरा पहर, नक्षत्र विशेष, शकेन्द्र की एक पटरानी,
आषाढ़ के कृष्ण पक्ष में रोहिणी से चन्द्रमा का योग होता है । रनी-रुदन ।
'ल'
लपलहइ-लाज प्राप्त करने, पहचानने योग्य । लठि-२१ । लाल-लाल
संख्या । लोपीय-लुप्त, अप्राप्त । लावीय-लाभ, सुन्दर रम्य । लुणिजइ-लुञ्च-
काटा हुआ । लोवट्टी-लोभपत्री, सुन्दर बारीक । लूण-नीमक, लयण । लापा-
लापा । लेइ-लेकर । लागिय-लगती थी । लाउ-प्रेम । लछण-लाछना ।
लागामी-लगाम । लथइ-हिल जाता है ।
- २०७ -
«व तथा य»
अनवउ-वर्णन करना । वरथीसल-वीर बीसलदेव । बिचिदण-विचक्षण ।
वेगम-शीघ्र । वरि-निकृष्ट । वइसार-बैठा कर । वसउ-वसइ-स्थान । वासउ-
वास । गल्या-किया। विचाल-बिचाल-अन्तराल । गरहा-बारह । वढ़िया-बढ़ना ।
वरधू-वरधू-वाद्यविशेष । विहूणया-दो वालों से । वयग्ण-कथन, वाणी । वेपि-
भेप । विहुणोअ-विहूण-अलग करना, बिना । वालि-राजा । बार-बारह ।
विरास्या-कष्ट दिया । बोलियइ-बोलना । वाटी-चेरी । वारि-द्वार । वाहला-
वाहलीया या वाहली-क्षुद्र नदी, छोटा नद । वीध-विधि, प्रकार । वइसवाइ-
बैठने के लिये । वासीयउ-राखिय-सुगन्धित किया हुआ, सत्कारित । वाउडइ-
वाहुडइ-वाहुट्टिअ-लज्जित । वाहुड्ड्याउ-लौटा । वज्र-यज्ञ । वार-मार्ग । वाह-
वायु । वाठुब्या-लौटना । बीज-बिजली । वाटल्ल-बाटल । वउलावीया-बुलाया ।
वुढडइ-वृद्ध । वजारि-मार्जार (बिल्ली) वायीया-बाँधा । विह-उसके । बार-
शीघ्र । वाणिया-बनियों । विहुणी-बिना । वाभतउ-उठते हुए । नवामणी-बधाई ।
वहिनडी-बहन । वुहार-झाडना । वइगा-शीघ्र । वीप-पग । विसहर-विषधर-
सर्प । वाकरउ-निर्वाह करूँगा । वीरा-भाई । वारउ-मना करना । वेस-वयस ।
वइसतउ-बैठने के लिये ।
«स” और “ष”
सवारइ-सुसज्जित करना । सरसीय-सरस, साथ । सगुण-सउण-प्रसिद्ध
शुभाशुभ सूचक नाड़ीस्पन्दन, काक-दर्शन आदि निमित्त, सगुन, गुण । सामाया-
समान । सामाणसा-सुपुरुषजन । सिंदिव्यो-सीलना । सुबाए-सुन्दर, चतुर ।
सुवर-अच्छा वर । समदीय उल्हूर-बिदा करना । सोनउ-सोगण, सोना । सिउ-
ससुरा । सगलउ-सकल, सब । सजहु-सजाना, सजाओ । सरगल-सदग-सौ की
कीमत का, अनेक । सजर-सजना । सावा-सगा १८ । सुहय-सुभग । सरिसिउ-
समान । सगल-सइल-सफल । सावटू-वस्त्र विशेष । संडहि-चादर । रहास-
सास । सगलीहि-सगल-सइल-सकल । सवालपड-सपादलक्ष, देश विशेष ।
सोवन-सोयण-सोना, सुवर्ण । सवाहीयउ-प्रशंसा । सु-से । सीपि-शिल्पा ।
साहणी-साहुनी । सुचग-धग-सुन्दर । सुणाउ-सुनो । सूकट-सिकोड़ना ।
साथि-साथ । स-सग । सिरि-सिर से । सहिणाण-चिन्ह, (पहचान) ।
सुणवियउ-सुनाना । सार-मूल्य । उत्कृष्ट, अच्छी । सायर-सागर-समुद्र ।
सूरि-गूर कर । सारिणी-सारिखस-समान, सरीखा । सारिपउ-सारिखस-सदृश,
समान । सउण-शकुन-सगुन । सउचरि-चार सौ । साढि-ऊँट । सकउ-सकना।
- ३०४ -
“ढ”
ढाफणउ-ढापा जाना, छिपाना। दुलई-चल रहा है।
“त”
तणउ-तण-तृण-घास। तुरीय-तुरग-घोड़ा। ताजीय-ताजी। ताणीया-
तणिअ-ताना हुआ। तिउरि-उसी प्रकार। तलइ-नीचे। तह-तेरे। तत-
तप्त। ताजणउ-घोड़े का। तापडउ-धूप। तुमनह-तुमसे। तूठउ-संतुष्ट।
तेजी-ताजो, घोड़े की एक जाति। तंगारह-तंबोलि-रान। तोरणि-बहिर्द्वार
तूठी-तुष्ट, प्रसन्न। तपई-तप्पइ 'तप करना', गरम होना, तपाना। वती-से।
“थ”
थोटी-थोटी-कुछ-कुछ।
“द”
देखउ-देखना। दातार-देने वाला, दाता। देउयो-दे। दीन-दिया।
दीयठ-दरवाजे पर। देडवढी-दुंदुभी। दाहिमा-दक्षिण दिशा, दक्षिण देश।
दाइजउ-दहेज। दिहाडउ-दिन। दावडी-लड़की, छोकड़ी। दीज-द्वितीया।
दाधा-जलाया हुआ। दिठि-दृष्टि दिटि-नजर, नेत्र। दवरती-दमयंती। दुषि-
दुःख। दुधू-दुग्ध-दूध। देवरुइ-देवता का। देव-देवता 'दृश्य' यहाँ बीसल
देव। दीप-दीपक (राजमती)।
“ध”
धीरियउ-धार का। धारइ-धारण किया। धान-धान्य, अन्न। धीन-
धान्य। धण-स्त्री राजमती। धवल्या-सफेद, सफेदी कराना। धवलीय-धौरी।
धीरय-वीर्य्य-धैर्य। धण का नाह-पति। धण-राजमती।
“न”
नवि-णवि (वैपरीत्य सूचक अव्यय) नहीं। नइ-णइ-नदी, नम्रतापूर्वक।
नवसर, नव-णव, नया। नावइ-न आवइ-नहीं आता है। नावीया-नहीं
आवोगे। नल्ह-नाल्ह कवि। नगर-शहर। नीकी-अच्छी, सुन्दर। नयण-
नयन-आँख। नीसरइ-णिस्सरइ, बाहर निकलना। णिवात-नवनीत-मक्खन।
नयर-नगर। नाह-णाह, नाथ। नरेश-नरों के स्वामी। नीसाणौ-नगाड़ा।
- २०५ -
नालेर-नारिकेल-नारियल । निवार, णिवार-निवारण । नवकरि-नमस्कार
करना । नयीण-नम्रतापूर्वक, नम्र होकर । निहालती-निरीक्षण करना-देखना ।
नाद-शान । न्हांग-नहाना । निरममां-निष्ठुर । नहड़ा-निकट ।
"प"
पयाण-प्रयाण-गमन, प्रस्थान । पाणही, पाणहा-जूता । पूगी-पूरा कर ।
पीक-पान का पीक । परिहसि-परिहास । पउलि-पौरि । पयउहर-पयोधर ।
पूहुउ-पूछो । पुरिणी-पूर्व का (उड़ीसा का) । पूति-पुत्त-पुत्र । पारण्ड-
पारण । परिगह-परिणगाह-ममत्व । परिमाण-प्रमाण । पूरव्वउ-पूर्व का ।
पाटलउ-पाटा । पृठि-पृष्ठि, पिठ्ठो, पृष्ठ, पीठ । परहरउ-छोड़ना (छोड़ा)
पहुता-पहुँचा । पग-पांव । पातलउ-पतला । पधारउ-पधारना, जाना । पछहं-
पीछे । पूरवी-पूर्व का । पाका-पका । पटोली-पट्ट, पहनने का कपड़ा । पसाउ-
प्रसादन-प्रसन्न करना । पलाणि-पलोँड । पाणइ-पानी । पालि-तालाब आदि का
बन्ध । पायस्या-पायस-खीर । पगर-पगड़ी । पोष-पौष मास । पालपी-पालकी ।
पहिरावणं-पहिरामण-पहिरावण-भेंट में दिया जाता है वस्त्र जो । परणि-विवाह ।
पश्चिम-पश्चिम । पहिरणइ-परिधान । पातली-पतली । परगास परकास-प्रकास-
दिया, इसा । पतंगउ-पन्ना, पंचांग । प्रथमइ-पहले । पठाइ-भेज दे । पालउ-
पालन करो । पतीयं-विश्वास करना । पाषारह-पाखार, काठी (घोड़ों पर पाखर
काठी) । पपालिज्यो-पतारना । पाट-रेशम । पटंबर-रेशमी वस्त्र । पऊत-
लउ-पहुँचा । पाइअइ-पाना । परिणवा-विवाह । पाइक-प्यादा, पैर से चलने
वाला सैनिक । पाटि-पीठ । पलाणीया-पलाणिअ-भागा, दौड़ा, भागा हुआ,
गया । पडलि-पडलिअ-पका हुआ, जला हुआ दुग्ध । पौरि-ड्योढ़ी । पहर-
पहनना । पतीजी-प्रतीति, विश्वास । परकाइ-दूसरों के शरीर में । पंषी-पक्षी ।
पउहर-पयोधर । परजल-प्रज्ज्वलित । पाइसुं-पायस-खीर ।
"फ"
फाटि-फटकर । फेडियउ-छोड़ना । फट्फइ-फड़कना । फिऱ्या-घूमा ।
फूला-फुलरा । फेरवी-फेरना ।
"भ"
भवण-उत्पत्ति, जन्म, मकान, असुर कुमार आदि देवों का विमान, सत्ता ।
भेदइ-भेदना, तोड़ना । भेरि-भेरी, वाद्य विशेष । भोगवउ-भोग करना ।
- २०८ -
मदि-मदना । सगलप-नागल-सपल-सफल । गोचिति-यह हृदय में । सांयलउ-
संबल । सुमाइ-सुमग-आनन्द । गं-गाथ, से । रांड-गमान । भीम-जर ।
मझोभित-सुशोभित । मुणीजा-सनेही, स्नेहियों । गंरया-थोड़ा । पाग्-पान ।
पाल-निचले भूभाग (गड्ढे) । पेह-खेद-धूलि-रज । विसाइ-चमक जाती है ।
पास्ड-सार । पाउलि-चौरी । पाइ-पाने बैठना । सद-सद्यः । मुरस-स्ववश-
स्वतन्त्र । सोपारइ-लग्न की सुपारी । सीला-शीतल । मुमतउ-धीरे-धीरे । संचि-
जइ-सींचते हैं ।
'६'
हस वाहण-हंसवाहिनी, सरस्वती । तुउ-तुझा । हउँरि-मैं । हियडलइ-
हृदय । ढेली-ढोली । हलवइ-धीरे । हारि-पराभूत होना ।
- सहायक ग्रन्थों की सूची *,
'छंद, रस, और अलंकार तथा भाषा'
१. उक्ति व्यक्ति प्रकरणम्— सं० मुनि जिनविजय तथा डा० सुनीति
कुमार चाटुर्ज्या ।
२ छंदोऽनुशासनम्— संपादक प्रो०एच० डी० वेलणकर ।
३ छंद प्रभाकर— जगन्नाथ प्रसाद "भानु" ।
४. पिंगल छंद सूत्रम्— पिंगलाचार्य, स्व०पं० सीतानाथ समाध्यायी
भट्टाचार्य द्वारा सम्पादित तथा श्री
गोविन्द चन्द्र काव्यतीर्थ पुराणाशास्त्री
द्वारा संशोधित ।
५. रघुनाथ रूपक गीतारा— मंश कवि 'त० महताब चन्द्र रांकेड,
'विशारद'जयपुरवाल । 'नागरी प्रचारिणी
सभा काशी ।'
६. अपभ्रंश मीटर्स— प्रो० एच० डी० वेलणकर, 'बम्बई
यूनिवर्सिटी जर्नल १६३३-३४ पृ०
३२-३४ ।'
७. राजस्थानी लोकगीत— स्व० श्री सूर्यकिरण पारीक, एम० ए० ।
८. रस गंगाधर— जगन्नाथ पण्डितराज 'सं०—पं०
पुरुषोत्तम शर्मा चतुर्वेदी, नागरी प्रचा-
रिणी सभा ।'
६ काव्य कल्पद्रुम— कन्हैयालाल पोद्दार ।
१० हिन्दी व्याकरण— कामताप्रसाद गुरु ।
११. नोट्स आन दि ग्रामर आफ
दी ओल्ड वेस्टर्न राजस्थानी— तेस्सितोरी ।
१२. हिन्दी भाषा का इतिहास — डा० धीरेन्द्र वर्मा ।
१३. राजस्थानी भाषा — डा० सुनीति कुमार चाटुर्ज्या ।
- २१० -
१४. राजस्थानी भाषा और साहित्य- पं० मोतीलाल मेनारिया।
१५. डिंगल में वीररस- " " "
१६. कम्परेटिव फाइलोलाजी- डा० पी० डी० गुने।
१७. लिंग्विस्टिक सर्वे आफ इण्डिया- वोल्यूम ६।
१८. अ ग्रामर आफ कम्पेरेटिव
आर्यन लैंग्वेज- जान बीम्स।
१६. अ ग्रामर आफ गाडियन
लैंग्वेज- ए० एफ० आर० हार्नले।
इतिहास, भूगोल, तथा अन्य पुस्तकें
२०. नागरी प्रचारिणी पत्रिका- संवत् १६५८, १६७६, १६८२, १६६५,
१६६६, १६६७.
२१. राजस्थानी पत्रिका- भाग ३
२२. एनुअल रिपोर्ट आन दी सर्च
फार हिन्दी मैन्युस्क्रिप्ट फार
दी इयर १६००।
२३. बार्दिक सेलेक्शन्स - लाला सीताराम।
२४. मिश्रबन्धुविनोद-
२५. पृथ्वीराज विजयाख्य महाकाव्यम्-जौनराज कृत टीका सहित
'बिब्लोथेका इंडिका प्रकाशन।'
२६. भारत के प्राचीन राजवंश-
२७ इण्डियन एन्टिक्वेरी 'वाल्यूम १४।'
२८. वेलिकृष्ण रुक्मिणीरी
२६. राजपूताने का इतिहास- डा० गौरी शंकर हीराचन्द्र ओझा।
३०. रिपोर्ट्स आफ दी आर्के
लाजिकल सर्वे आफ इण्डिया।
३१. हिस्ट्री आफ ओरीसा- श्री आर० डी० बनर्जी
३२ एनल्स एण्ड ऐन्टिक्लीटीज
आफ राजस्थान- कर्नल टाड।
- २११ -
३३ राजपूताने का इतिहास- जगदीश सिंह गहलोत ।
३४. हिस्ट्री आफ मालवा- मालकम ।
३५ वंश भास्कर- सूर्यमल्ल मिश्र ।
३६. अजमेर मारवाड़ गजेटियर सी० सी० वाटसन ।
३७. अजमेर हिस्टारिकल एण्ड
डेसक्रिप्टिव- एच० बी० शारदा ।
३८ डाइनेस्टिक हिस्ट्री आफ
नादर्न इण्डिया । वाल० १ एव २ डा० एच० सी० राय ।
३६ राजा भोज- विश्वेश्वर नाथ रेऊ ।
४०. एन्स्येन्ट जोमफी आफ इंडिया-एलेक्जेण्डर कनिंघम ।
४१ सेन्ट्रल इण्डिया गजेटियर ।
४२. एन्शियन्ट हिस्ट्री आफ इण्डिया वा० ए० स्मिथ ।
४३ इण्डियन क्रानोलगी- एल० डी० कन्नास्वामी पिल्लइ
४४ हिस्ट्री आफ ओरीसा- एल० के० महताब ।
४५ जर्नल आफ द एशियाटिक
सोसाइटी 'बंगाल' ।
४६ इण्डियन एराभ - एलेक्जेण्डर कनिंघम ।
४७ एन्शियन्ट इण्डियन हिस्ट्री-विनायक राव ।
४८ मगरह मेरवाड़े की कौमों का
इतिहास ।
४६ द ग्लोरी दैत वाज गुजरात
देश (भाग ३)- श्री के० एम० मुन्शी ।
५०. हिस्टोरिकल इन्सक्रिप्शन्स
आफ गुजरात- जी० वी० आचार्य ।
५१. हिस्ट्री आफ मेडिवियल हिन्दू
इण्डिया- सी० सी० वैद्य ।
५२. हिस्ट्री आफ पारमार्स आफ
मालवा- डी० सी० गांगुली ।
- २१२ -
५३. एन्सियन्ट इण्डिया ऐज डेसक्राइब्ड् बाई टालेमो ।
५४ वीर काय— डा० उदयनारायण तिवारी ।
५५ बीसलदेव रासो— श्री सत्यजीवन वर्मा ।
५६ बीसलदेव रासो— डा० माताप्रसाद गुप्त ।
५७ हिन्दी साहित्य का इतिहास-आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ।
५८. हिन्दी साहित्य का आलो
चनात्मक इतिहास— डा० रामकुमार वर्मा ।
- शब्द कोष *
५६ पाइ अ - सद् - महार्णवो ।
६०. अभिधान राजेन्द्र ।
६१ संस्कृत हिन्दी डिक्शनरी -- मानियर विलियम ।
६२ वैदिक इंडेक्स । मैकडोनेल और कोय ।
६३ हिन्दी शब्द सागर ।
६४ ढोला मारू रा दूहा ।
६५ डिंगल रा सबद । रायल एशियाटिक सोसाइटी में सुरक्षित
पाण्डुलिपि । राजस्थाना पाण्डुलिपियों
की सूची पत्र स० ३८ सी० १६ ।
अंग्रेजी ग्रन्थ
1 Introduction to the Principles of Textual Criticism—
Dr. Katre
2 The Grammar of Old Western Rajasthani—Dr L P.
Tissitori
3. Comperative Philology—Dr. P. D. Gune.
4 Linguistic Survey of India—Vol IX.
5 History of Orrisa—R. D Banerjee
6 Rajasthan—Todd (Crooke's Edition)
7. History of Malwa—Malcolm.
8 Hindi Search Reports
9 A Grammer of Comperative Aryan Language—John Beams.
10 A Grammar of Gandhian Language—A. F R Horenle.
11 Gujrati Language & Literature—N B Divatia
12 Ajmer-Merwara Gazetteer—C C Watson
13 Dynastic History of Rajput (Vol I & II)—Dr Hem Ray
14. History of Kanauj—Dr R S Tripathy
15 Ancient Geography of India—Cunningham
16 Gazetteer of C. India—(Malva Dhar)
17 Ancient History of India—V A Smith
18. Ajmer—H B. Sarda
19 Marwar Ka Itihas—Biswesuar Nath Reu
20. Indian Chronology—L D Swami K. Pillai
21. History of Orrissa—H. K Mahatab
22 Indian Eras—Cunningham.
23 Bardic Chronicals of Rajsthan.
24. The Glory that was Gujarat-Desha P. III—K. M. Munshi.
25 Historical Inscriptions of Gujrat—G. V Acharya
26 History of Mediawal Hindu India—C V. Vaidya
27 History of the Parmars of Malwa—D C. Ganguly.
28 Ancient India as described by—Ptolemy.
29. Rajputana Gazetteer Vol I & II