बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
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नालेर-नारिकेल-नारियल । निवार, णिवार-निवारण । नवकरि-नमस्कार
करना । नयीण-नम्रतापूर्वक, नम्र होकर । निहालती-निरीक्षण करना-देखना ।
नाद-शान । न्हांग-नहाना । निरममां-निष्ठुर । नहड़ा-निकट ।
"प"
पयाण-प्रयाण-गमन, प्रस्थान । पाणही, पाणहा-जूता । पूगी-पूरा कर ।
पीक-पान का पीक । परिहसि-परिहास । पउलि-पौरि । पयउहर-पयोधर ।
पूहुउ-पूछो । पुरिणी-पूर्व का (उड़ीसा का) । पूति-पुत्त-पुत्र । पारण्ड-
पारण । परिगह-परिणगाह-ममत्व । परिमाण-प्रमाण । पूरव्वउ-पूर्व का ।
पाटलउ-पाटा । पृठि-पृष्ठि, पिठ्ठो, पृष्ठ, पीठ । परहरउ-छोड़ना (छोड़ा)
पहुता-पहुँचा । पग-पांव । पातलउ-पतला । पधारउ-पधारना, जाना । पछहं-
पीछे । पूरवी-पूर्व का । पाका-पका । पटोली-पट्ट, पहनने का कपड़ा । पसाउ-
प्रसादन-प्रसन्न करना । पलाणि-पलोँड । पाणइ-पानी । पालि-तालाब आदि का
बन्ध । पायस्या-पायस-खीर । पगर-पगड़ी । पोष-पौष मास । पालपी-पालकी ।
पहिरावणं-पहिरामण-पहिरावण-भेंट में दिया जाता है वस्त्र जो । परणि-विवाह ।
पश्चिम-पश्चिम । पहिरणइ-परिधान । पातली-पतली । परगास परकास-प्रकास-
दिया, इसा । पतंगउ-पन्ना, पंचांग । प्रथमइ-पहले । पठाइ-भेज दे । पालउ-
पालन करो । पतीयं-विश्वास करना । पाषारह-पाखार, काठी (घोड़ों पर पाखर
काठी) । पपालिज्यो-पतारना । पाट-रेशम । पटंबर-रेशमी वस्त्र । पऊत-
लउ-पहुँचा । पाइअइ-पाना । परिणवा-विवाह । पाइक-प्यादा, पैर से चलने
वाला सैनिक । पाटि-पीठ । पलाणीया-पलाणिअ-भागा, दौड़ा, भागा हुआ,
गया । पडलि-पडलिअ-पका हुआ, जला हुआ दुग्ध । पौरि-ड्योढ़ी । पहर-
पहनना । पतीजी-प्रतीति, विश्वास । परकाइ-दूसरों के शरीर में । पंषी-पक्षी ।
पउहर-पयोधर । परजल-प्रज्ज्वलित । पाइसुं-पायस-खीर ।
"फ"
फाटि-फटकर । फेडियउ-छोड़ना । फट्फइ-फड़कना । फिऱ्या-घूमा ।
फूला-फुलरा । फेरवी-फेरना ।
"भ"
भवण-उत्पत्ति, जन्म, मकान, असुर कुमार आदि देवों का विमान, सत्ता ।
भेदइ-भेदना, तोड़ना । भेरि-भेरी, वाद्य विशेष । भोगवउ-भोग करना ।