बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)
Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans
नरपति नाल्ह द्वारा
पृष्ठ 291, कुल 315 में से
संदर्भ में पढ़ें- १८८ -
हिमालय की चौहद्दी के सम्बन्ध में श्री भागवत में ५ वें स्कन्ध के १६वें
अध्याय में लिखा है :—'एवं दक्षिणेनेलावृतं निषधो हेमकूटो हिमालयः
इति प्रागायता यथा नीलादयः । अयुतयोजनोत्सेधा हरिवर्षकिम्पुरुषभारतानां
यथामसंख्यम् ।' अर्थात् इसका विस्तार जहाँ भागवत पुराण के अनुसार सहस्र
योजन बताया गया है, वहीं आज के वैज्ञानिक युग में इसकी सीमा को नापने-
जोखने का कार्य हो रहा है और इसकी चौहद्दी को निर्धारित करने का प्रयास
जारी है। सफलता कहाँ तक मिलेगी कहा नहीं जा सकता। यों कहा जा सकता
है कि इसके उत्तरी-पश्चिमी छोर पर काश्मीर और जम्मू राज्य का आधे से
अधिक हिस्सा है। इसके पूर्व में उत्तर-प्रदेश, कुमायूँ तथा टेहरी राज्य हैं।
इनके अतिरिक्त नेपाल, भूटान तथा सिक्किम के वे राज्य हैं, जो भारतवर्ष की
सीमा में सम्मिलित नहीं हैं।
हिमालय भारतवर्ष की प्रायः सभी प्रसिद्ध नदियां यथा गंगा, यमुना, शारदा
या काली आदि नदियों का उद्गम हिमालय के उत्तरी पर्वत श्रेणी है।
'करनाली' नदी का, जो घाघरा के नाम से भारत में प्रसिद्ध है, उद्गम स्थान
उत्तर पर्वत-श्रेणियों से दूर तिब्बत से है।
हिमालय की प्रसिद्ध चोटियों में एवरेस्ट चोटियाँ २६००२ फुट, नागा पर्वत
२६१८२ फुट, नन्दादेवी २५६६१ फुट, त्रिशूल २३३८२ फुट, पाचौखो
२२६७३ फुट तथा नन्दकोट २२५३८ फुट हैं।
हिमालय की तराइयों में विभिन्न प्रकार के लोग पाए जाते हैं। काश्मीर
में लद्दाख से लेकर भूटान तक हिन्दचीन के लोग ऊपरी हिस्सा में ही पाये
जाते हैं, लेकिन सिक्किम, दार्जिलिंग और भूटान में ये लोग इन देशों के निचले
भागों में भी वर्तमान हैं। हिमालय का एक यही ऐसा हिस्सा है जहाँ बौद्ध धर्म
जीवित रूप में वर्तमान है। मुसलमानों ने इस भाग में इस्लाम धर्म के प्रचार
का यथेष्ट प्रयत्न किया लेकिन यहाँ का जलवायु तथा प्राकृतिक असुविधाओं ने
सर्वदा उनके प्रयत्न को निष्फल बनाया। १४ वां शताब्दी में मुलतान सिकन्दर
ने इस्लाम धर्म का प्रचार तलवार के जोर पर इन हिस्सों में करना आरम्भ
किया लेकिन काश्मीर प्रान्त को छोड़कर इस धर्म का प्रचार ओर कहीं नहीं
हो सका। जम्मू तथा हिमालय की तराई में उत्तर प्रदेश और पंजाब के हिस्सों
में हिन्दू धर्म को ही प्रधानता है। नेपाल में भी राज-परिवार का धर्म
हिन्दू ही है। यद्यपि यहाँ हिन्दू धर्म के साथ ही साथ बौद्ध धर्म का प्रचार
भी यथेष्ट हुआ है। यहाँ के जिन हिस्सों में हिन्दू धर्म की प्रधानता है वहाँ के