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बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)

बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)

Bijaganitam of Bhaskaracharya II with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा

DevanagariHindipublished152 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 152 में से

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पृष्ठ 9

वियत् खस्य खं खेन घाते" is Bhaskara's Bījagaṇita, verse:
"योगे खं क्षेपसमं वर्गादौ खं खभाजितो राशिः ।
खहरः स्यात् खगुणः खं खगुणाच्चिन्त्यश्च शेषविधौ ॥"
Wait, what is the verse here?
Line 16: "(१) वधादौ वियत् खस्य खं खेन घाते"
Wait! That's the half-verse of Bhaskara's Lilavati or Bijaganita?
In Lilavati:
"योगे खं क्षेपसमं..."
In Bijaganita:
Line 8: "खसंकलनव्यकलने करणसूत्रं वृत्तार्धम् ।"
Line 9: "खयोगे वियोगे धनर्णं तथैव च्युतं शून्यतस्तद्विपर्यासमेति ।"
(This is Bijaganita verse 8 or so: "खयोगे वियोगे धनर्णं तथैव च्युतं शून्यतस्तद्विपर्यासमेति ॥")
Line 11: "रूपत्रयं स्वं क्षयगं च खं च किं स्यात् खयुक्तं वद खाच्च्युतं च ।"
(This is the example from Bijaganita!)
Line 15: "खगुणादिषु करणसूत्रे वृत्तार्धम्