बीजगणितम् (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय समीकरण एवं बीजगणित सूत्र सटीक)
Bijaganitam of Bhaskaracharya II with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा
पृष्ठ 128, कुल 152 में से
संदर्भ में पढ़ेंि द्ध्यै->प्रौढिसिद्ध्यै. Wait, in : उल्लसदमलमतीनां त्रैराशिकमात्रमेव पाटी बुद्धिरैव बीजम् । Is itबुद्धिरैव`? Yes, clearly written with two matras on 'र'.
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सब प्रकार की संस्कृत पुस्तको के मिलने का एकमात्र पताः—
Everything looks extremely accurate and faithful to the image.१३० बीजगणिते
तथा गोले मयोक्तम् ।
उल्लसदमलमतीनां त्रैराशिकमात्रमेव पाटी बुद्धिरैव बीजम् ।
तथा गोलाध्याये मयोक्तम् ।
अस्ति त्रैराशिकं पाटी बीजं च विमला मतिः ।
किमतावत् सुबुद्धीनामतो मन्दार्थमुच्यते ॥
गणकभणितिरम्यं बाललीलावगम्यं
सकलगणितसारं सोपपत्तिप्रकारम् ।
इति बहुगुणयुक्तं सर्वदोषैर्विमुक्तं
पठ पठ मतिवृद्ध्यै लघ्विदं प्रौढिसिद्ध्यै ॥
इति श्रीभास्कराचार्यविरचिते सिद्धान्तशिरोमण