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सर्वकोश
बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

बिहारी सतसई (महाकवि बिहारीलाल - लाला भगवानदीन कृत सविastार हिन्दी टीका सहित)

Bihari Satsai with Hindi Commentary

महाकवि बिहारीलाल (टीकाकार: लाला भगवानदीन) द्वारा

DevanagariHindipublished290 पृष्ठ

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पृष्ठ 22

साहित्यपरिचय (२१)
संचारीभाव तेतीसहैं निर्वेद,ग्लानि,शंका,असूया,मद,श्रम,
आलस्य,दीनता,चिन्ता,मोह,स्मृति,धृति,लाज,वेग,चपलता,
जड़ता, हर्ष, गर्व, विषाद, नींद, अमर्ष, औत्सुक्य,
अपस्मार, सोना, बोध, उग्रता, मरण, बुद्धि, व्याधि, अव-
हित्थ, त्रास, उन्मादता, तर्क, विलास यह तेतीस संचारी
नौरसके साथ रहतेहैं ।
स्थायीभाव ।
सब भावनि सरदार है, टारिसक नाह कोय ।
सो थिरभाव बखानिये, रस स्वरूप जो होय ॥
इनके नौ भेद ।
रस सुहास अरु शोक पुनि, कहत क्रोध उत्साह ।
भय अरु ग्लानी आचरज,थिरभावनु कविनाह॥
शांतरसका निर्वेद भी स्थायी होता है ॥
रसोंके भेद ।
पहलो रस शृंगार पुनि, हास्यरु करुण बखानि ।
रौद्रो वीर भयानकौ, अरु वीभत्सहि जानि ॥
अद्भुतसों मिलि आठ यह, रस नाटकमें होत ।
शांतिसहित नौ कथितमें,कविकुल कहत उदोत॥
शृंगारमें कामका उद्भेद होताहै उत्तम प्रकृति में नवीन
अनुरागिणी नायिका आलम्बन है दक्षिणादि नायक आलंब-