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सर्वकोश
भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

भुशुण्डि रामायण (काकभुशुण्डि एवं गरुड़ संवाद - पूर्वखण्ड सविस्तार व्याख्या)

Bhusundi Ramayana: Purva Khanda with Commentary

महर्षि भुशुण्डि (सम्पादक: डॉ. भगवतीप्रसाद सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished423 पृष्ठ

पृष्ठ 61, कुल 423 में से

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पृष्ठ 61

" (no)?
It is literally printed as: "भूत्वायुमंम" (or "भूत्वायुममं")!
Wait, look at the dot (anusvara):
Is it over the first म or the second म?
The dot is right above the first म!
Wait, is there a dot above the second म? No.
So it is printed as "भूत्वायुमंम".

Let's double-check all lines and transcribe them with utmost precision:

Line by line:
Header:
– ४७ –

Verse 14:
न चचाल स तैर्भावैः पवमानैरिवाचलः ।
ततस्ता विफलायासा भूत्वायुमंम संनिधौ ॥ १४ ॥

Verse 15:
जातश्चैव ततोऽत्यर्था चिन्तयाहं समाकुलः ।
नूनं स्थानं मे कुशिको ग्रहीष्यति तपोबलात् ॥ १५ ॥

Speaker:
बृहस्पतिरुवाच

Verse 16:
काम आमन्त्र्यतां शीघ्रमस्मिन् कार्ये मनोभवः ।
रतिश्चैव वसन्तश्च तवाज्ञावशगा ह्यमी ॥ १६ ॥

Verse 17:
यदा तस्मिन् वने रम्ये वसन्तः कुसुमाकरः ।
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