भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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२—'मेष' लग्न वालों को गोचर-कुण्डली से विभिन्न भावों में स्थित 'केतु'
का अस्थायी-फलादेश निम्नलिखित उदाहरण-कुण्डलियों में देखना चाहिए—
जिस वर्ष में 'केतु'—
(क) 'मेष' राशि पर हो तो संख्या २१२
(ख) 'वृष' राशि पर हो तो संख्या २१३
(ग) 'मिथुन' राशि पर हो तो संख्या २१४
(घ) 'कर्क' राशि पर हो तो संख्या २१५
(ङ) 'सिंह' राशि पर हो तो संख्या २१६
(च) 'कन्या' राशि पर हो तो संख्या २१७
(छ) 'तुला' राशि पर हो तो संख्या २१८
(ज) 'वृश्चिक' राशि पर हो तो संख्या २१९
(झ) 'धनु' राशि पर हो तो संख्या २२०
(ञ) 'मकर' राशि पर हो तो संख्या २२१
(ट) 'कुम्भ' राशि पर हो तो संख्या २२२
(ठ) 'मीन' राशि पर हो तो संख्या २२३
'मेष' लग्न में 'सूर्य'
'मेष' लग्न वाली कुण्डली से 'प्रथमभाव' स्थित 'सूर्य' का फलादेश
मेष लग्न : प्रथमभाव : सूर्य
+---------------+---------------+
| \ २ / \ १२ /
| ३ \ / १ \ / ११
| \ / सू \ /
+----------\ / \ /---------+
| X X |
| ४ / \ ७ / \ १० |
| / \ / \ |
+----------/ \ \ /---------+
| ५ / \ ६ / \ ९ |
| / ६ \ / ८ \ |
+---------------+---------------+
[११६]
पहले भाव में अपने मित्र मंगल की राशि में
उच्चस्थ सूर्य अपने मित्र मंगल की राशि पर है, अतः
जातक तेजस्वी, विद्वान्, साहसी, स्वस्थ, स्वाभिमानी
तथा पराक्रमी होगा। महत्वाकांक्षा, व्यवहार-कुशलता,
धैर्य आदि सद्गुण प्राप्त होंगे तथा सन्तानें भी अधिक
होंगी।
परन्तु सूर्य की सप्तमभाव पर नीच-दृष्टि पड़ने
के कारण जातक के दाम्पत्य-सुख में कमी रहेगी। पत्नी
(यदि स्त्री की जन्मकुण्डली हो तो पति) अधिक सुन्दर नहीं होगी। पति-पत्नी में
मन-मुटाव भी रह सकता है। दैनिक जीविकोपार्जन के क्षेत्र में भी अनेक प्रकार की
कठिनाइयाँ आती रहेंगी।