भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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अमर योग
यदि सभी पापग्रह केन्द्र में हों, अथवा सभी
शुभ ग्रह केन्द्र में हों तो इन दोनों प्रकार से अमर
योग बनता है। पापग्रहों के अमर योग में जन्म
लेने वाला जातक क्रूर-स्वभावी राजा तथा शुभ
ग्रहों के अमर योग में जन्म लेने वाला जातक
सौम्य-स्वभावी राजा होता है।
[कुण्डली १६३२]
एकावली योग
लग्न अथवा किसी भी भाव से आरम्भ
करके क्रमशः सातभावों में सात ग्रह स्थित हों, तो
ऐसा जातक महाराजा होता है।
[कुण्डली १६३३]
द्वितीय हंस-योग
सभी ग्रह मेष, कुम्भ, धनु, तुला, मकर
तथा वृश्चिक राशि में हों, तो ऐसा व्यक्ति राजा
अथवा राजपूजित एवं सब प्रकार के ऐश्वर्यों का
स्वामी होता है।
[कुण्डली १६३४]