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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि
(६) चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और
शनि की युति हो तो जातक धनी, गुणी, यशस्वी,
पवित्र हृदय वाला, आलसी, अनेक पत्नियों वाला,
गुणवान्, राजमान्य अथवा राजमंत्री होता है।
सात ग्रहों की युति का फलादेश
सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि
यदि सातों ग्रह—सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध,
गुरु, शुक्र और शनि एक ही भाव में बैठे हों तो
जातक सूर्य के समान तेजस्वी, धनी, दानी,
राजाओं द्वारा सम्मानित तथा शिवजी का परम
भक्त होता है।
स्त्री-जातक
सामान्यतः पुरुष अथवा स्त्री की जन्म-कुण्डली के विभिन्न भावों में स्थित
ग्रहों का फलादेश एक-जैसा ही होता है, परन्तु कुछ ग्रहों की विभिन्न भावों में स्थिति
के फलस्वरूप स्त्रियों के सम्बन्ध में उनके फलादेश में अन्तर भी आ जाता है। ऐसे
अन्तर वाले फलादेश के विषय में आगे लिखे अनुसार समझ लेना चाहिए।
स्त्रियों के सम्बन्ध में विशिष्ट फलादेश की विस्तृत जानकारी के लिए हमारी
लिखी पुस्तक 'स्त्री-जातक' का अध्ययन करना चाहिए।
(१) जिस स्त्री के जन्म-काल में लग्न
तथा चन्द्रमा सम-राशि पर हो (चित्र १५४४),
यह स्त्री स्वाभाविक आकार वाली होती है।