भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 612, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ें६२२
सूर्य, चन्द्र, मंगल बुध, शुक्र, शनि
(३) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र और शनि
की युति हो तो जातक चिन्तित, प्रत्येक बात में संशय
करने वाला, संग्राम अथवा विवाद में विजय पाने वाला,
वन-पर्वतों में विचरण करने वाला तथा जातक स्वभाव
का होता है।
१४३८
सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र, शनि
(४) सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि
की युति हो तो जातक क्रोधी, कृपण, धनी, सुखी,
लोभी, सुन्दर, स्त्रियों को प्रिय, भ्रान्त-बुद्धि, राजाओं
का कृपापात्र तथा युद्ध करने के लिए तैयार रहने वाला
होता है।
१४३९
सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र, शनि
(५) सूर्य, चन्द्र बुध, गुरु, शुक्र और शनि की
युति हो तो जातक धर्मज्ञ, वेदज्ञ, दयालु, क्षमाशील,
स्त्री-विहीन, राज-मन्त्री, राजा द्वारा सम्मानित तथा
लोक में प्रसिद्ध होता है।
१४४०
सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि
(६) सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि
की युति हो तो जातक क्षमाशील, ब्रह्म-विद्या का वेत्ता,
भिक्षुक, वनवासी, तीर्थयात्री तथा धन, स्त्री एवं पुत्र से
विहीन होता है।
१४४१