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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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मंगल, बुध, गुरु, शुक्र
[कुण्डली १४१० : लग्न में मं. १, बु., गु., शु.]
(३१) मंगल, बुध, गुरु और शुक्र की युति
हो तो जातक सुशील, धनी, दयालु, राज-मान्य,
स्वस्थ, लोकप्रिय, परन्तु अपनी स्त्री से कलह
करने वाला होता है।
मंगल, बुध, गुरु, शनि
[कुण्डली १४११ : लग्न में मं. १, बु., गु., श.]
(३२) मंगल, बुध, गुरु और शनि की
युति हो तो जातक सत्यवादी, पवित्र-हृदय, विनम्र,
धैर्यवान्, विद्वान् सुवक्ता, शूर-वीर परन्तु धनहीन
होता है।
मंगल, बुध, शुक्र, शनि
[कुण्डली १४१२ : लग्न में मं. १, बु., शु., श.]
(३३) मंगल, बुध, शुक्र और शनि की
युति हो तो जातक मधुरभाषी, मल्ल-विद्या में
निपुण, लोक-प्रसिद्ध, पुष्ट शरीर वाला तथा कुत्तों
को पालने वाला होता है।
मंगल, गुरु, शुक्र, शनि
[कुण्डली १४१३ : लग्न में मं. १, गु., शु., श.]
(३४) मंगल, गुरु, शुक्र और शनि की युति
हो तो जातक धूर्त, विषयी, मानी, विनम्र, साहसी
विद्वान्, धनी, पर-स्त्रीगामी तथा श्रेष्ठ मनुष्यों को
प्रिय होता है।