भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचन्द्र, गुरु, शुक्र, बुध
[कुंडली १४७६ : लग्न (१) में चन्द्र, गुरु, शुक्र, बुध]
(२७) चन्द्र, गुरु, शुक्र और गुरु की युति
हो तो जातक सुन्दर शरीर वाला, दयालु, दानी,
चतुर, पण्डित, शास्त्रज्ञ, धनी, शत्रु-विहीन तथा
माता-पिता से रहित होता है।
चन्द्र, गुरु, शनि, बुध
[कुंडली १४७७ : लग्न (१) में चन्द्र, गुरु, शनि, बुध]
(२८) चन्द्र, गुरु, शनि और बुध की युति
हो तो जातक कवि, ज्ञानी, यशस्वी, धर्मात्मा,
इन्द्रियजित्, बन्धु-प्रिय, तेजस्वी राज्य-मन्त्री तथा
सर्वप्रिय होता है।
चन्द्र, बुध, शुक्र, शनि
[कुंडली १४७८ : लग्न (१) में बुध, चन्द्र, शुक्र, शनि]
(२९) चन्द्र, बुध, शुक्र और शनि की
युति हो तो जातक धनी, गाँव का स्वामी, राजा
द्वारा सम्मानित, अनेक पत्नियों वाला तथा नेत्र-
रोगी होता है।
चन्द्र, गुरु, शुक्र, शनि
[कुंडली १४७९ : लग्न (१) में गुरु, चन्द्र, शुक्र, शनि]
(३०) चन्द्र, बुध, शुक्र और शनि की युति
हो तो जातक पण्डित, परोपकारी, पुरुष-श्रेष्ठ,
पर-स्त्रीगामी तथा धनहीन होता है। उसकी
दानी मोटे शरीर वाली होती है। कुछ विद्वानों के
मतानुसार ऐसा व्यक्ति स्थूल शरीरवाला, धर्मात्मा
तथा चतुर होता है।