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सर्वकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 584, कुल 638 में से

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पृष्ठ 584

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सूर्य और बुध
(३) सूर्य और बुध की युति हो तो जातक
यशस्वी, प्रियवादी, श्रेष्ठ बुद्धिमान्, विद्वान्, मन्त्री, राजा
का सेवक, वेदज्ञ, गीत-वाद्य में कुशल, कवि, सेवा-कर्म
करने में पटु, स्थिर धनी, यशस्वी तथा राज्य द्वारा
सम्मानित होता है।
सूर्य और गुरु
(४) सूर्य और गुरु की युति हो तो जातक
शास्त्रज्ञ, धर्मात्मा, धनवान्, चतुर, परोपकारी, पौरोहित्य
कर्म करने में कुशल, प्रसिद्ध, मित्रवान्, राज-मान्य तथा
लोक-प्रसिद्ध होता है।
सूर्य और शुक्र
(५) सूर्य और शुक्र की युति हो तो जातक
संगीत, वाद्य एवं शस्त्र-विद्या में कुशल, बुद्धिमान्, नाट्य-
कार, श्रेष्ठ, कार्यक्षम, मित्रवान्, बलवान्, क्षीण-दृष्टि
तथा स्त्री द्वारा धन प्राप्त करने वाला होता है।
सूर्य और शनि
(६) सूर्य और शनि की युति हो तो जातक
विद्वान्, गुणवान्, श्रेष्ठ बुद्धि वाला, धर्मात्मा, धातु का
काम करने में कुशल तथा वृद्धों के समान आचरण करने
वाला होता है।
कुछ विद्वानों के मत से ऐसा व्यक्ति स्त्री-पुत्र के
सुख से रहित—और कुछ के मत में सुख-युक्त—होता है।