भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 390, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ें'वृश्चिक' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश
वृश्चिक लग्न : अष्टम भाव : बुध
आठवें भाव में स्वराशि स्थित 'बुध' के
प्रभाव से जातक की आयु में वृद्धि होती है तथा
पुरातत्त्व का लाभ होता है।
सातवीं मित्रदृष्टि से द्वितीयभाव को देखने
से जातक स्वविवेक द्वारा धन का संचय करता
है। उसे कौटुम्बिक सुख भी प्राप्त होता है। ऐसा
व्यक्ति अमीरी ढंग का जीवन बिताता है।
'वृश्चिक' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश
वृश्चिक लग्न : नवमभाव : बुध
नवें भाव में मित्र 'चन्द्रमा' की राशि पर
स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक के भाग्य एवं धर्म
की वृद्धि होती है। साथ ही आयु तथा पुरातत्त्व
का लाभ भी होता है।
सातवीं मित्रदृष्टि से तृतीयभाव को देखने
से कुछ कमियों के साथ ही भाई-बहिन का सुख
मिलता है तथा पराक्रम की वृद्धि भी होती है।
ऐसा व्यक्ति प्रायः सुखी तथा भाग्यशाली जीवन
बिताता है।
'वृश्चिक' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश
वृश्चिक लग्न : दशमभाव : बुध
दसवें भाव में मित्र 'सूर्य' की राशि पर
स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक की कुछ कठिनाइयों
के साथ पिता का सुख एवं लाभ तथा राज्य एवं
व्यवसाय के क्षेत्र में सम्मान और सफलता की
प्राप्ति होती है। पुरातत्त्व एवं आयु का लाभ भी
होता है।
सातवीं मित्रदृष्टि से चतुर्थ भाव को देखने
से कुछ कठिनाइयों के साथ माता, भूमि एवं भवन
आदि का सुख भी प्राप्त होता है।