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सर्वकोश
भोजनकुतूहल: प्रथम भाग (रघुनाथ नवहस्त - आहार-रसायन, पाकशाला-व्यवस्था व विरुद्धाहार)

भोजनकुतूहल: प्रथम भाग (रघुनाथ नवहस्त - आहार-रसायन, पाकशाला-व्यवस्था व विरुद्धाहार)

Bhojanakutuhala of Raghunatha Navahasta

रघुनाथ नवहस्त (सम्पादक: सूरनाड कुंजन पिल्लै) द्वारा

DevanagariSanskritpublished358 पृष्ठ

पृष्ठ 175, कुल 358 में से

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पृष्ठ 175

I will transcribe what is visible: शर्करारूतां or शर्करारूपतां). Actually, wait! Look at the top of that letter: is it हू? No. Let's transcribe शर्करारूतां or शर्करारूपतां. Wait, look at the blank space between रू and तां: there isn't one, they are right next to each other. So it's 2 syllables: रूतां! So शर्करारूतां!

Everything else is verified and very clean.१६४ भोजनकुतूहले
वह्निपाकात् कालपाकाद्वा शर्करारूतां गतं मधु मधुशर्करा ।
तद्गुणा मधुसदृशगुणा ।
सामान्यशर्करागुणमाह वाग्भटः -
दाहतृट्छर्दिमूर्छासृक्पित्तघ्न्यः सर्वशर्कराः ।
सर्वा उक्तां मत्स्यण्डिकायाः मधुशर्करा च । मत्स्यण्डिकादौ
रक्तपित्तहरत्वग्रहणमतिशयार्थम् । अन्यत्र च शर्करागुणाः -
शुद्धस्फटिकसङ्काशा निर्मला सितशर्करा ।
शर्करा ज्वरपित्तासृङ्मूर्च्छाच्छ