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सर्वकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

पृष्ठ 844, कुल 1167 में से

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धान्यवर्गः ७९३
हैं जिनमें पुंकेशर ६ तथा स्त्रीकेशर की कुक्षि पंखसदृश एवं संख्या में २ होती हैं। लाल चावल में स्त्रीकेशर लाल रहते
हैं।
यद्यपि चावल की एक ही जाति (Species) है तथापि इसके सैकड़ों प्रकार पाये जाते हैं। भावप्रकाशकार भी
इससे सहमत होते हुए इसके मुख्य ४ भेद, (१) शालि, (२) रक्तशालि, (३) व्रीहि एवं (४) षष्टिक करते हैं। इनमें
से प्रथम हेमन्त ऋतु में पककर तैयार होता है। दूसरा लाल रंग का होता है। तीसरा वर्षाकाल में पककर तैयार होता
है। चौथा ६० दिन में या जल्दी तैयार होता है। अधिकतर प्रथम ही होता है।
स्थानभेद, पकने के ऋतु के भेद, पकने के काल (अवधि) भेद, चावल के अन्दर रहने वाले पिष्टमय पदार्थ, चावल
या धान के रंग, आकार, नाप, शूक रहित या शूक युक्त भेद से इसके अनेक प्रकार मिलते हैं।
घटिया किस्म में अधिकतर लाल चावल के प्रकार पाये जाते हैं। यह लाली बहुत अन्दर तक नहीं रहती। किसी-
किसी अच्छे प्रकार में भी लाल चावल होते हैं तथा उनका स्वाद भी अच्छा होता है। इसीलिए कहीं-कहीं चावल को
रंग देते हैं किन्तु यह रंग जल से धोने पर निकल जाता है।
नये चावल की अपेक्षा पुराना चावल सुपाच्य होता है। परीक्षणों से देखा गया है कि नये चावल की पचन क्षमता
पुराने की अपेक्षा आधी से कम होती है। रखने से इसमें से स्टार्च में परिवर्तन होने से यह प्रभाव देखा जाता है। पकाने
में भी नये का भात चिपचिपा तथा गोला सा हो जाता है किन्तु पुराने का बहुत अच्छा बनता है।
चावल साफ करने की विधि के अनुसार भी चावल के पोषक तत्त्वों में परिवर्तन हो जाता है। कुछ उबाल कर
फिर धान छुड़ाये हुए भुजिया चावल (Paraboiled-पैराबॉइल्ड) में तथा हाथ कुटे चावल में, मिल से साफ किये हुये
की अपेक्षा नाइट्रोजन द्रव्य अधिक रहते हैं।
निम्नलिखित तालिका से इसका अन्तर साफ मालूम होता है।
रासायनिक संगठन-

- - -जलअलब्यूनिनाम द्रव्यस्नेहकार्बोहाइड्रेटरेशाराख
हाथ कुटा चावल१२.२८.५०.६७८.००.६०.७
मिल का साफ किया हुआ चावल१३.०६.९०.४७९.२००.५
भुजिया, हाथकुटा चावल१२.६८.५०.६७७.४००.९
भुजिया, मिल का साफ किया हुआ चावल१३.३६.४०.४७९.१००.८
लावा१४.७७.५०.१७४.३०३.४
चिउड़ा१२.२६.६१.२७८.२०१.८

गुण और प्रयोग-प्रधान भोजन के रूप में अनेक प्रान्तों में इसका उपयोग किया जाता है।
इसको अधिक जल में पतला पकाकर अतिसार, संग्रहणी तथा अन्य पाचन के विकारों में देते हैं।
चावल की धोवन दाहशामक तथा स्नेहन होने से ज्वर, दाह एवं आंत्रिकप्रदाह आदि में दी जाती है।