भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविषय-सूची
१. आयुर्वेदप्रवक्तृप्रादुर्भावप्रकरण | पृष्ठ
पृष्ठ | रजस्वला स्त्रियों के नियम २०
आयुर्वेद का लक्षण १ | रजस्वला के नियम पालन नहीं करने पर दोष २१
आयुर्वेद की निरुक्ति १ | स्नानोत्तर रजस्वला स्त्री का कर्तव्य २१
आयुर्वेद का उत्पत्ति क्रम २ | रजस्वला के साथ सम्भोग निषेध २१
२. सृष्टिप्रकरणम् | स्त्री योनि की नाड़ियाँ और उसकी विशेषता २२
| सम-विषम रात्रियों में स्त्री संभोग करने का फल २२
ग्रन्थोपक्रम १० | पुरुष के लिए स्त्री सम्भोग का विधान २३
प्रकृति के स्वरूपविशेष ११ | स्त्री सम्भोग में अयोग्य पुरुष २३
प्रकृति-पुरुष के समान धर्म ११ | स्त्री के लिये पुरुष सम्भोग का विधान २३
प्रकृति-पुरुष के विभिन्न धर्म ११ | सम्भोग के अयोग्य स्त्री २३
प्रकृति के नाम तथा गुण १२ | रजस्वला के साथ सम्भोग निषेध २३
सत्त्वगुण से युक्त मन के लक्षण १२ | गर्भस्थिति का क्रम २३
रजोगुण से युक्त मन के लक्षण १३ | गर्भाशय के स्वरूप २४
तमोगुण से युक्त मन १३ | गर्भ में जीव के प्रवेश करने का प्रकार २५
महत्तत्व की उत्पत्ति १३ | गर्भाशय का द्वार बन्द होने का समय २५
अहङ्कार की उत्पत्ति और भेद १४ | यमज सन्तान उत्पन्न होने का कारण २५
त्रिविध अहङ्कार के कार्य १४ | पुत्र, पुत्री और नपुंसक सन्तान होने के कारण २६
बुद्धि और कर्मेन्द्रिय से मन की अभिन्नता १४ | सद्यः गर्भवती हुई स्त्री के लक्षण २७
बुद्धीन्द्रियों के विषय १५ | गर्भवती स्त्रियों के लक्षण २७
कर्मेन्द्रिय और मन के विषय १५ | पुत्र गर्भवती स्त्रियों के लक्षण २७
पंचतन्मात्रों की उत्पत्ति के विषय १५ | कन्या गर्भवती स्त्रियों के लक्षण २८
पंचमहाभूतों की उत्पत्ति १६ | नपुंसक गर्भ के लक्षण २८
आकाश के गुण १६ | नपुंसकों के भेद तथा लक्षण २८
वायु, अग्नि, जल तथा पृथ्वी के गुण १६ | अनस्थि सन्तानोत्पत्ति के लक्षण ३०
आठ प्रकृतियों में पहिली प्रकृति १७ | सन्तानों में चेष्टादिभेद के कारण ३१
सप्त प्रकृतियाँ १७ | गर्भ के लक्षण ३१
सोलह विकार १८ | हृदय के स्वरूप ३२
जीवात्मा के निवासस्थान १८ | शरीरस्थ दोषों का स्वरूप ३४
जीवात्मा और शरीरी १८ | दोष शब्द की निरुक्ति ३४
जीवविषयक गुण १९ | त्रिदोषों में वायु के स्वरूप ३५
३. गर्भप्रकरणम् | उदानादि वायुओं के नाम, स्थान तथा कर्म ३६
रजस्वला स्त्री के स्वरूप २० | पित्त के स्वरूप ३७
गर्भग्रहण के योग्य समय २० |
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