भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ
पृष्ठ 1000, कुल 1167 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 1000
यहाँ पृष्ठ का पूर्ण एवं शुद्ध लिप्यन्तरण (transcription) प्रस्तुत है:
अनेकार्थनामवर्गः १४१
श्वेतपुष्पः-श्वेतार्कः, इन्द्रवारुणी च।
१०६. श्वेतपुष्प-सफेद आक और इन्द्रायण।
तुवरी-सौराष्ट्री, आढकी च।
१०७. तुवरी-सोरठी माटी और अरहर।
कुम्भिका-कट्फलः, वारिपर्णी च।
१०८. कुम्भिका-कायफल और जलकुम्भी।
राजपुत्रिका-रेणुका, जाती च।
१०९. राजपुत्रिका-रेणुका और जाई (चमेली)।
रक्तपुष्पः-रक्तार्कः, कन्दुंरी१ च।
११०. रक्तपुष्प-लाल आक और कन्दुरी।
सप्तला-शातला, वासन्ती च।
१११. सप्तला-शातला और नेवारी।
विषमुष्टिकः-महानिम्बः विषतिन्दुकश्च। १
११२. विषमुष्टिक-बकायन और कुचला।
[L16