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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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इस्लाम और भारत ६५
सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन को पवित्र और उच्च करना, और इन सब से
बढ़ कर मनुष्य मात्र की समता और भ्रातृत्व का उपदेश देना । इसलाम के
गौण, विवादास्पद, या अहितकर पहलू से इस स्थान पर हमें कोई सम्बन्ध
नहीं है । वास्तव में मोहम्मद साहब के उपदेश धार्मिक, सामाजिक और
राजनैतिक तीनों क्षेत्रों में एक सा प्रभाव रखते थे । इन उपदेशों ने अरबों
के अन्दर एक नई रूह फूँक दी । वे धार्मिक और राजनैतिक दिग्विजय के
लिए अपने देश से निकल पड़े और मोहम्मद साहब की मृत्यु के क़रीब सौ
साल के अन्दर ही उन्होंने सभ्य संसार के एक बहुत बड़े हिस्से पर अपना
प्रभुत्व क़ायम कर लिया ।
मुसलमानों की हुकूमत
सन् ६२९ ईसवी में मक्का नगर ने मोहम्मद साहब की अधीनता
स्वीकार की । सन् ६२९ से ६३१ तक दो साल के अन्दर तमाम अरब मोह-
म्मद साहब के अधीन हो गया । ६३२ में मोहम्मद साहब की मृत्यु हुई ।
सन् ६३६ में इराक़ (मैसोपोटेमिया) और शाम (सीरिया) पर अरबों ने
विजय प्राप्त की । सन् ६३७ में उन्होंने बैतुलमुक़द्दस (जेरूसेलम) पर क़ब्ज़ा
किया । सन् ६३७ से ६४१ तक समस्त ईरान अरबों के शासन में आ गया ।
सन् ७०१ से ७१५ तक मुसलमानों ने पूरब में चीन की सरहद तक धावा
किया और समस्त तातार और तुर्किस्तान को अपने साम्राज्य में मिला लिया ।
इसके साथ ही साथ इस साहसी जाति की नज़र पच्छिम की ओर
गई । सन् ६३८ से ६४१ तक समस्त मिस्र ( इजिप्ट ) अरबों के शासन में
आ गया । ६४७ से ७०६ तक कारथेज और शेष समस्त उत्तर अफ़रीका
पर अरबों का साम्राज्य क़ायम हो गया । यूरोप का विशाल रोमन साम्राज्य
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