भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसर जॉन शोर ४११
कोई कोई अंगरेज़ यह भी लिखते हैं कि नाना फड़नवीस से
कुछ अनबन होने की वजह से पेशवा ने इस तरह आत्महत्या कर ली।
किन्तु उस समय की तमाम परिस्थिति को देखने से यह
मालूम होता है कि नाना और पेशवा के परस्पर वैमनस्य और
आत्महत्या की यह कहानी केवल नाना के ख़िलाफ़ लोगों के कान
भरने के लिए गढ़ी गई थी। मुमकिन है कि पेशवा का छज्जे से
गिर पड़ना अकस्मात् हुआ हो, किन्तु इससे कहीं ज़्यादा मुमकिन
यह है कि पेशवा के किसी दुशमन या नमकहराम सेवक ने उसे
मौक़ा पाकर ढकेल दिया। मॉस्टिन के समय में राघोबा को पेशवा
की मसनद पर बैठाने के लिए पेशवा नारायणराव की हत्या की जा
चुकी थी; कौन आश्चर्य है यदि मैलेट के समय में राघोबा के पुत्र
बाजीराव को मसनद पर बैठाने के लिए नारायणराव के पुत्र पेशवा
माधोराव दूसरे की हत्या कराई गई हो और मैलेट तथा बाजीराव
के किसी गुप्तचर ने मौक़ा पाकर उसे छज्जे से ढकेल दिया हो !
माधोराव की पैदाइश के समय से अंगरेज़ बराबर उसके ख़िलाफ़
थे और उसकी अकाल मृत्यु से उन्हें बेहद खुशी हुई।
पेशवा माधोराव नारायण की आयु मृत्यु के समय केवल २१
साल की थी। उसके कोई लड़का न था, किन्तु
[हाशिया: अन्तिम पेशवा] हिन्दू रिवाज के अनुसार उसकी विधवा को
[हाशिया: बाजीराव] गोद लेने का अधिकार था। अंगरेज़ों ने इस
समय राघोबा के पुत्र बाजीराव को पेशवा बनाने का यत्न किया।
तुकाजी होलकर अंगरेज़ों के कहने में था। पूना पहुँच कर उसने