भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवे और हम ६६
स्पेन्सर के विचार
प्रसिद्ध अंगरेज़ तत्ववेत्ता हरबर्ट स्पेन्सर पिछले क़रीब सौ साल के ईस्ट
इण्डिया कम्पनी के भारतीय शासन का सन् १८४१ में सिंहावलोकन करते
हुए लिखता है—
"पिछली सदी में भारत में रहने वाले अंगरेज़, जिन्हें बर्क ने
'भारत में शिकार की ग़रज़ से जाने वाले फ़सली परिन्दे' बतलाया
है, अपने मुक़ाबले के पेरू और मेक्सिको निवासी यूरोपियनों❄
से कुछ ही कम ज़ालिम साबित हुए। कल्पना कीजिए कि उनके
कृत्य कितने कलुषित रहे होंगे, जब कि कम्पनी के डाइरेक्टरों तक
ने यह स्वीकार किया कि 'भारत के आन्तरिक व्यापार में जो
बड़ी बड़ी पूँजियां कमाई गई हैं वे इतने ज़बरदस्त अन्यायों
और अत्याचारों द्वारा प्राप्त की गई हैं, जिनसे बढ़ कर अन्याय
और अत्याचार कभी किसी देश या किसी ज़माने में भी सुनने
में नहीं आए।' अनुमान कीजिए कि वन्सीटॉर्ट ने समाज की
जिस दशा को बयान किया है वह कितनी बीभत्स रही होगी, जब
कि वन्सीटॉर्ट हमें बतलाता है कि अंगरेज़ भारतवासियों को विवश
करके जिस भाव चाहते थे, उनसे माल ख़रीदते थे और जिस
भाव चाहते थे उनके हाथ बेचते थे, और जो कोई इनकार करता
tyranny ever before discovered; such as the world has nothing similar to
show."—The English in India—System of Territorial Acquistion, by
William Howitt.
❄ जिन्हों ने वहां के लाखों आदिमनिवासियो को अंग भंग कर के
और उनका शिकार खेल खेल कर उन्हें निर्मूल कर दिया—लेखक