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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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सर जान मैकफ़रसन ३६७
इसके बाद मैकफ़रसन का नवाब करनाटक की मुसीबतों की ओर
कभी ध्यान भी न गया।
मैकफ़रसन केवल बीस महीने गवरनर जनरल रहा। इससे
पहले कम्पनी अपने भारतीय इलाक़ों के लिए
मैकफ़रसन के
कृत्य और चरित्र दिल्ली सम्राट शाहआलम को ख़िराज दिया करती
थी। इस ख़िराज के चार करोड़ रुपए अब
कम्पनी की ओर निकलते थे। माधोजी (महादजी) सींधिया ने
सम्राट की तरफ़ से यह रक़म तलब की, किन्तु मैकफ़रसन ने देने
से इनकार कर दिया। अवध के नवाब को मैकफ़रसन ने अपने से
पहले के गवरनर जनरल के समान खूब चूसा। मैकफ़रसन के बाद
उसके उत्तराधिकारी लॉर्ड कॉर्नवालिस ने ८ अगस्त सन् १७८६ को
कलकत्ते से इंगलिस्तान के भारत मन्त्री हेनरी डण्डाश के नाम एक
गुप्त पत्र लिखा, जिसमें कॉर्नवालिस ने मैकफ़रसन के "नाजायज़
तरीक़ों से कमाए हुए धन" उसकी "साफ़ चालबाज़ियों", उसके
"निर्लज्ज झूठों", उसकी "दुरंगी चालों और कमीनी साज़िशों"*
का जगह जगह ज़िक्र किया है।
भारत से लौटकर मैकफ़रसन पार्लिमेण्ट की मेम्बरी के लिए
खड़ा हुआ। चुनाव में वह जीत गया। बाद में साबित हुआ कि
वह रिश्वतें देकर जीता है और उसका चुनाव रद्द कर दिया गया।

  • ". . . ill earned money . . . His flimsy cunning and shameless
    falsehoods . . . his duplicity and low intrigues . . ."-Lord Cornwallis'
    letter dated 8th August 1789 to the Rt. Hon'ble Henry Dundas concerning
    Sir John Macpherson.