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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 636

देता था। दाढ़ी और मूंछें वह इतनी साफ़ रखता था कि नकचुटनी
से एक एक बाल निकलवा देता था। उसकी देखादेखी उसके
अधिकतर दरबारी भी दाढ़ी न रखते थे और मूंछें यदि रखते थे
तो इतनी कम कि जो दूर से दिखाई न देती थीं। हैदरअली को
लाल कपड़ों का शौक़ था और अपने सर पर वह एक सौ हाथ
लम्बी लाल पगड़ी बाँधता था।
शिकार का और ख़ास कर शेर के शिकार का उसको बड़ा
शौक़ था। उसके यहाँ अनेक शेर पले हुए थे जो
शेर पालना रोज़ सुबह खुले हुए उसके सामने लाए जाते
थे। हैदरअली अपने हाथ से इन शेरों को लड्डू खिलाया करता
था। उनके पञ्जों और जबड़ों में वह लड्डू दे देता था। लिखा है
कि उसका निशाना कभी चूकता न था। अपने सामने अखाड़े
में वह अक्सर शेर के साथ अपने किसी एक वीर सिपाही की
कुश्ती कराया करता था। यदि सिपाही शेर को पछाड़ पाता तो
उसे इनाम-ओ-इकराम दिए जाते थे और यदि शेर हावी होने
लगता, तो हैदर फ़ौरन दूर से बैठा हुआ शेर की कनपटी पर गोली
मार देता और इससे पहले कि शेर का पञ्जा सिपाही पर पड़
सके, शेर गोली खाकर गिर पड़ता था।
हैदरअली के शारीरिक परिश्रम और कष्ट सहन की कोई सीमा
न थी। वह कई कई रातें जंगल में बारिश और
हैदरअली का कष्ट सरदी के अन्दर घोड़े की पीठ पर गुज़ार देता
सहन था। घोड़ों, हाथियों, तोपों और रसायण का