भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४८ भारत में अंगरेज़ी राज
को अचानक क़िले पर हमला किया। केवल नायक, बीस सिपाही
और कुछ स्त्रियाँ क़िले में रह गई थीं। अंगरेज़ी सेना के हमले की
ख़बर पाकर नायक ने क़िले का फाटक बन्द करवा दिया, बड़े बड़े
पत्थर अँधेरे में क़िले की फ़सील पर रखवा दिए और स्त्रियों ने
बहुत सा गोबर और पानी घोलकर बड़े बड़े बरतनों में खौलाना
शुरू किया। जिस समय अंगरेज़ी सिपाही दीवारों पर चढ़ने लगे,
स्त्रियों ने चिल्ला कर पत्थर नीचे की ओर लुढ़का दिए और
खौलता हुआ गोबर का पानी अंगरेज़ी सेना के सर पर डालना
शुरू किया। भीतर के बीस सिपाहियों ने भी अपनी बन्दूकों का
उचित उपयोग किया। अं... सिपाहियों को एक बार घबरा कर
नीचे उतर आना पड़ा। इतने में क़िले की वह सेना जो बाहर गई
हुई थी, आवाज़ सुन कर क़िले की ओर लपकी। अंगरेज़ी सेना के
बचे हुए आदमियों को जान बचा कर भाग जाना पड़ा।
एक बार साफ़ मालूम होता था कि हैदरअली दक्खिन भारत
से अंगरेज़ों को निकाल कर बाहर कर देगा।
[हाशिया: हैदरअली की] नाना फड़नवीस पूना में बैठा हुआ यह सब
[हाशिया: अचानक मृत्यु] सुसमाचार सुन रहा था और इन्हीं आशाओं
के आधार पर सालबाई के सन्धि पत्र पर दस्तख़त करने से इनकार
कर रहा था। जिस समय गायकवाड़, सींधिया और भोंसले तीन
तीन ज़बरदस्त मराठा नरेश मराठा मण्डल और अपने देश दोनों के
साथ विश्वासघात कर चुके थे, और निज़ामुलमुल्क भी अंगरेज़ों
की चालों में फँस चुका था, उस समय इन विदेशियों के विरुद्ध