भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४२ भारत में अंगरेज़ी राज
को पूरिमपाक में टीपू और करनल बेली की सेनाओं में लड़ाई
पूरिमपाक की हुई। जनरल मनरो ने अपना एक दस्ता बेली
लड़ाई की सहायता के लिए भेजा। उधर हैदर भी
रातों रात चल कर टीपू की सहायता के लिए
आ पहुँचा। मैदान ख़ूब गरम हुआ, टीपू की सेना ने सामने और
पीछे दोनों ओर से अंगरेज़ी सेना पर हमला करके और उनके बीच
में घुसकर अंगरेज़ी सेना का संहार शुरू किया। यहाँ तक कि
अंगरेज़ी सेना का तोपखाना बेकार हो गया। अन्त में उनके
तोपख़ाने में आग लग गई और अंगरेज़ी सेना को बुरी तरह हार
खानी पड़ी। लिखा है कि इस लड़ाई में कम्पनी के हज़ारों भारतीय
सिपाहियों के अलावा सात सौ अंगरेज़ मारे गए और दो हज़ार
को जिनमें स्वयं करनल बेली और सर डेविड बेयर्ड जैसे अफ़सर
शामिल थे हैदर ने गिरफ़्तार कर लिया। अंगरेज़ों के लिए
पूरिमपाक की हार अत्यन्त अशुभसूचक और लज्जाजनक थी।
हैदर ने अपनी राजधानी श्रीरङ्गपट्टन में दरियादौलत नामक बाग़
की दीवारों पर इस लड़ाई का एक विशाल सुन्दर चित्र खिंचवाया
जो अभी तक मौजूद है।
जनरल मनरो इस समय अपनी सेना सहित गञ्जी स्थान में
ठहरा हुआ था। विजयी हैदर ने गुण्टूर की
अरकाट की विजय अंगरेज़ी सेना को ख़त्म करके गञ्जी की ओर रुख़
किया। हैदर अभी गञ्जी से कुछ मील दूर ही था कि करनल बेली
की पराजय का हाल सुनकर और हैदर के सवारों को अपनी ओर